जेपीएनआईसी बनाने के लिए बजट में खेल करने वाले आर्किटेक्ट सौरभ गुप्ता की फर्म आर्कओम एलडीए के निशाने पर


आर्किटेक्ट फर्म आर्कओम का सपा सरकार में जलवा था

लखनऊ। जेपीएनआईसी का निर्माण कराने में बजट बढ़ाते रहे आर्किटेक्ट सौरभ गुप्ता की फर्म आर्कओम को एलडीए ने नोटिस देकर कार्रवाई के लिए निशाने पर लिया है। सपा सरकार में जिस फर्म का जलवा रहता था, उसे अब प्रोजेक्ट में देरी और न्यूनतम आवश्यक आइटम भी डीपीआर में शामिल न करने के लिए नोटिस दिया गया है। इसमें कहा गया कि निर्माण चालू रहते हुए बजट तिगुना हो गया। वहीं, तीन बार डीपीआर बदली गई। फिर भी जरूरी विस्तृत डीपीआर नहीं बन सकी।

एलडीए के अधिशासी अभियंता आनंद मिश्र ने जारी नोटिस में कहा कि सात फरवरी 2013 को आर्किटेक्ट सलाहकार के रूप में अनुबंध के समय शासन से स्वीकृत बजट 265.58 करोड़ रुपये था। इसमें फर्म को डीपीआर और आर्किटेक्चर डिजाइन बनाकर देनी थी। इसके उलट काम शुरू कराते हुए दोगुना से अधिक बजट की डीपीआर बनी। संशोधित डीपीआर के बाद 2014 में तत्कालीन सरकार ने 615.44 करोड़ रुपये को स्वीकृति दी। इस बीच काम चालू रहा। दो साल बाद फिर से नए काम प्रोजेक्ट में जुड़े। इसके बाद एक और संशोधित डीपीआर बनी। इस बार फर्म की सलाह पर 2016 में 864.99 करोड़ रुपये को स्वीकृति दी गई।

आर्किटेक्ट की वजह से छवि हुई खराब
नोटिस में कहा गया कि विस्तृत डीपीआर 265.58 करोड़ की देनी थी। काम शुरू होने के बाद 691.06 करोड़ की डीपीआर बना दी। इसमें से 615.44 करोड़ रुपये को मंजूरी मिली। अप्रत्याशित रूप से बजट बढ़ाने के बाद भी संशोधित डीपीआर बनी। इसमें भी न्यूनतम आवश्यक आइटम शामिल नहीं किए गए, जबकि काम चालू था। प्रोजेक्ट की विस्तृत डीपीआर बनाकर अतिरिक्त काम व मदों को शामिल किया जाता तो बार-बार बजट पुनरीक्षित कराने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे परियोजना में देरी और बजट वृद्धि से बचा जा सकता था। इससे एलडीए और शासन की भी छवि खराब हुई है। एलडीए अधिकारियों के मुताबिक अब फिर से 975 करोड़ रुपये की डीपीआर एलडीए को बनवानी पड़ी है। यानी, करीब 110 करोड़ रुपये के काम अभी कराए जाने हैं।
बजट के साथ बढ़ी खुद की कमाई
प्रोजेक्ट में आर्किटेक्ट फर्म को भुगतान कुल बजट के सापेक्ष तय अनुपात में दिया जाना था। ऐसे में सीधे तौर पर जब बजट बढ़ा तो आर्किटेक्ट की कमाई बढ़ गई। एलडीए ने नोटिस में कहा कि कई आइटम तो आवश्यकता से अधिक मात्रा में खरीदवाए गए।
आर्किटेक्ट का रहता था पूरा जलवा
आर्किटेक्ट फर्म आर्कओम का सपा सरकार में जलवा था। खुद एलडीए अधिकारी बताते हैं कि सीएम आवास तक में आर्किटेक्ट सौरभ गुप्ता को सीधा प्रवेश मिलता था। एलडीए के वरिष्ठ अधिकारियों को भी फर्म से मिले निर्देश मानने होते थे। एलडीए अधिकारी या इंजीनियर तक कोई भी सलाह या सुझाव इस प्रोजेक्ट में नहीं दे सकते थे। उनका काम सिर्फ निर्देशों के मुताबिक काम करना होता था।


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