पांच साल में चमकेंगे दस हजार लोहिया ग्राम


उत्तर प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था आजादी के बाद से ही लागू रही है। समय बीतने के साथ-साथ यह व्यवस्था भी सुदृढ़ होती गयी है। आज प्रदेश में पचास हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं जो स्थानीय स्तर की शासन-व्यवस्था में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। यद्यपि राज्य सरकार की ओर से पंचायती राज विभाग के लिए भारी-भरकम बजट निर्धारित किया जाता है तथापि पंचायतों के सामने कर्ई तरह की समस्याएं बनी रहती हैं। इन तमाम विषयों को लेकर चौपाल चर्चा के संपादक मनोज दुबे ने राज्य के पंचायती राज मंत्री कैलाश यादव से जो बेलाग बातचीत की, उसे हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं-

kailash yadavपंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन को किस तरह लागू किया जा रहा है? इस दिशा में प्रगति की क्या स्थिति है?
गांवों को स्वच्छ बनाने के काम में हम पहले से ही लगे हैं। निर्मल भारत अभियान के अन्तर्गत वर्ष 2022 तक लोगों को खुले में शौच के लिए जाने की मजबूरी से निजात दिलाने का लक्ष्य रखा गया था। हमारा उद्देश्य गांव के लोगों के सामान्य जीवन स्तर में सुधार लाने का है। अब केन्द्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन लागू किया है। इसके अन्तर्गत शौचालय की लागत 10,900 से बढ़ाकर 12 हजार रूपये कर दी गयी है। इसमें से 9,000 रूपया केद्र सरकार देगी, शेष राज्य सरकार को देना है। मनरेगा कन्वर्जेंस को खत्म कर दिया गया है लेकिन इसके बारे में केन्द्र सरकार की गाईडलाइन्स अभी आनी है। इस वित्त वर्ष में 12,22,262 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराये जाने का लक्ष्य है। ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का निर्माण करवाया जा रहा है। आंगनबाड़ी शौचालयों के निर्माण, सामुदायिक शौचालय संकुल बनवाने और तरल तथा ठोस अपशिष्ठï प्रबंधन की व्यवस्था भी की गयी है।
शौचालय निर्माण के लिए बी.पी.एल. श्रेणी के तो सभी परिवार लिये जा रहे हैं। ए.पी.एल. परिवारों में जो परिवार अनुसूचित जाति/जनजाति के हैं, जिस परिवार में कोई विकलांग व्यक्ति है या जिस परिवार की मुखिया कोई महिला है, उन्हें भी इस योजना के लाभार्थियों में शामिल किया गया है। लघु एवं सीमान्त किसानों और भूमिहीन खेतिहर मजदूरों वाले एपीएल परिवार भी लाभान्वित होंगे।
वित्त वर्ष में लक्षित 12,38,856 शौचालयों में से 2,57,204 शौचालयों का निर्माण करवाया जा चुका है।

काम की रफ्तार देखते हुए वर्ष के भीतर पूरा लक्ष्य प्राप्त करना क्या संभव हो सकेगा?
बिल्कुल पूरा होगा। हम काम में तेजी लायेंगे।

स्वच्छता अभियान के तहद गांवों में नियुक्त किए गए सफाईकर्मी काम नहीं कर रहे, ऐसी शिकायतें मिल रही हैं। इसके बारे में कुछ कर रहे हैं?
जिन सफाईकर्मियों के बारे में ऐसी शिकायतें मिलती हैं, उनके विरूद्घ नियुक्ति प्राधिकारी/जिला पंचायतीराज अधिकारी के स्तर से यथोचित कार्रवाई की जाती है।

कितने सफाईकर्मी नियुक्त किये गये हैं?
प्रत्येक राजस्व ग्राम के लिए एक सफाईकर्मी की व्यवस्था है। सफाईकर्मियों के कुल एक लाख 8 हजार 848 पद स्वीकृत किए गए हैं। ये सफाईकर्मी अपने जॉब कार्ड के अनुसार सफाई का काम कर रहे हैं।

पंचायतों में कर्मचारियों की कमी की समस्या काफी समय से महसूस की जा रही है। हजारों पद खाली पड़े हैं…?
कर्मचारियों की कमी रही है, लेकिन रिक्त पदों को भरने का काम शुरू हो गया है। पंचायतों का कामकाज देखने के लिए ग्राम पंचायत अधिकारियों के 8,135 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 2,926 पद रिक्त हैं। इन पर भर्ती के लिए शासनादेश जारी हो चुका है। जिला पंचायत राज अधिकारी के स्तर से इन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन प्रकाशित करवाकर आवेदन भी मांगे जा चुके हैं।

नयी भर्ती कब तक हो जायेगी?
बड़ी संख्या में आवेदन मिले हैं। इनकी फीडिंग का कम चल रहा है। शीघ्र ही पद भर लिए जायेंगे।

प्रदेश में सभी पंचायतों के पास भवन नहीं हैं। जिन पंचायतों के अपने भवन हैं, उनमें से बहुत से जर्जर हालत में हैं। कई जगह पंचायत भवनों पर अवैध कब्जे की भी खबर है। इस संबंध में क्या कार्रवाई की जा रही है?
पंचायतों के लिए भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है। इस वित्त वर्ष में 87 पंचायत भवनों का निर्माण करवाये जाने का लक्ष्य है, इसके लिए 622.49 लाख रुपये का प्राविधान भी कर दिया गया है। पंचायतों को अपनी परिसम्पत्तियों जैसे पंचायत भवनों, स्कूल भवनों, अन्य सामुदायिक भवनों, सार्वजनिक मार्गों और दूसरी सार्वजनिक सम्पत्तियों के रख-रखाव के लिए धन राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। इसी तरह क्षेत्र पंचायतों को भी परिसम्पत्तियों के रख-रखाव के लिए धन प्रदान किया जाता है जिससे वे अपनी खुद की और उन परिसम्पत्तियों की मरम्मत करवाती हैं जो उन्हें हस्तांतरित की गयी हों। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, पशु चिकित्सालय, कृषि रक्षा केन्द्र, बीज विपणन गोदाम आदि की मरम्मत क्षेत्र पंचायतें ही करवाती हैं।
राज्य वित्त आयोग योजनान्तर्गत वर्ष 2014-15 हेतु पंचायती राज संस्थाओं के लिए रू.4,39,017.55 लाख का बजट प्राविधान किया गया है। इसमें से ग्राम पंचायतों के लिए रू. 3,07,312.29 लाख क्षेत्र पंचायतों के लिए रू.43,901.75 लाख और जिला पंचायतों हेतु रू.87,803.51 लाख का प्राविधान रखा गया है। इस वित्त वर्ष में अब तक पंचायतीराज संस्थाओं हेतु प्राविधानित कुल राशि में से 1,28,333 लाख रुपये अवमुक्त किये जा चुके हैं, इसमें से 89,833 लाख रुपये ग्राम पंचायतों के लिए, 12,833 लाख रुपये क्षेत्र पंचायतों के लिए और 25,667 लाख रुपये जिला पंचायतों के हिस्से आये हैं। इसके अलावा 13वें वित्त आयोग योजना के अन्तर्गत वर्ष 2014-15 के आय-व्ययक में पंचायती राज संस्थाओं हेतु कुल 3,33,202 लाख का बजट प्राविधान है। इसमें से ग्राम पंचायतों हेतु 2,33,241.40 लाख, क्षेत्र पंचायतों हेतु रू. 33,320.20 लाख एवं जिला पंचायतों हेतु रुपया 66,640 लाख रूपये का प्राविधान है। इस वित्त वर्ष में अगस्त तक रुपया 1,16,075 लाख की राशि अवमुक्त हुई है, जिसमें से ग्राम पंचायतों के लिए रुपया 81,253.15 लाख, क्षेत्र पंचायतों के लिए रुपया 11,607.59 लाख और जिला पंचायतों हेतु रुपया 23,215.18 लाख अवमुक्त किये गए हैं। ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों के लिए अवमुक्त राशि मुख्यत: मूलभूत सुविधाओं यानि पेयजल सुविधा, सीवेज व्यवस्था, तरल एवं ठोस अपशिष्ठï प्रबंधन, मार्ग प्रकाश, मार्गों और दूसरी नागरिक सुविधाओं के रख-रखाव पर खर्च की जाती है।

राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान की क्या स्थिति है?
राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण योजना के लिए कुल 6,614.51 लाख रुपये का प्राविधान किया गया है। इस योजना में 75 प्रतिशत राशि भारत सरकार से मिलती है और 25 प्रतिशत मैचिंग ग्राण्ट राज्य सरकार से प्राप्त होती है, जो प्राप्त हो चुकी है। इससे ग्राम पंचायतों को डेस्कटॉप कम्प्यूटर सिस्टम उपलब्ध करवाये जाते हैं, पंचायत सहायकों को तैनात किया जाता है और पंचायत भवनों का निर्माण भी करवाया जाता है। आई.ई.सी. गतिविधियां और कार्यक्रम प्रबंधन गतिविधियां भी इसी से चलायी जाती है।

गांवों के विकास के लिए अपने विभाग की किसी विशेष योजना का जिक्र करना चाहेंगे?
देखिए, अभी हमने एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू किया है। अगले पांच वर्षों में डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के अन्तर्गत सूबे के दस हजार राजस्व गांवों को चयनित कर उन्हें विकसित करना है। हर साल करीब 2100 गांवों का चयन किया जायेगा। इन गांवों में सी.सी. रोड बनेगी, के.सी. ड्रेन निर्माण किया जायेगा। अन्दर के मार्गों पर इन्टरलाकिंग टाइल्स लगायी जायेंगी। आंतरिक गलियों के निर्माण के लिए दो हजार की आबादी वाले गांवों में 20 लाख रूपये, 2000 से 5000 की आबादी वाले गांवों में 30 लाख रुपये और इससे अधिक आबादी वाले गांवों में 40 लाख रूपये व्यय किए जायेंगे। इस वित्त वर्ष में चयनित 2096 राजस्व ग्रामों के लिए कुल 48,750 लाख रुपये का बजट प्राविधान कर दिया गया है।

ऐसा क्यों है कि तमाम प्रयासों के बावजूद पंचायतें सशक्त नहीं हो पा रही है?
उत्तर: ऐसा नहीं है। पहले की अपेक्षा अब ग्राम पंचायतें कहीं ज्यादा सशक्त हैं। लोग जागरूक हो रहे हैं। उनमें अपने अधिकारों के प्रति चेतना आयी है। और जहां तक सशक्तीकरण का सवाल है, यह एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है वैसे-वैसे ग्राम पंचायतें भी मजबूत बनकर उभर रही हैं। यह प्रक्रिया तो बराबर चलती ही रहेगी।

पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण तो मिल गया है, लेकिन उन्हें वास्तविक अधिकार नहीं मिले…?
नहीं-नहीं। धरातल पर स्थिति बहुत बदल गयी है और लगातार बदलाव आ रहा है। महिलाएं अब बहुत सजग हो गयी हैं। वे अब लगातार सक्रिय होती जा रही हैं। उन्हें अपने अधिकार का इस्तेमाल करना आ गया है। हालात अब बहुत बदल गए हैं।

क्या आपको नहीं लगता कि गांवों के लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे में और ज्यादा जागरूक करने की जरूरत है?
इसके लिए सरकारी अमला तो अपना काम करता ही है, असली भूमिका जनप्रतिनिधियों की है। यह ग्राम प्रधानों और पंचायत सदस्यों की जिम्मेवारी है कि वे आम आदमी को सरकारी योजनाओं के बारे में न केवल जानकारी दें बल्कि यह भी देखें कि उनका लाभ जरूरतमंद को मिले। जन प्रतिनिधियों की मुख्य भूमिका तो यही है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Scroll To Top