उत्तर प्रदेश सरकार ने नई स्टार्टअप नीति के अन्तर्गत् चार स्टार्टअप्स हेतु विपणन सहायता अनुमोदित की


  • अपर मुख्य सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स की अध्यक्षता में नीति कार्यान्वयन इकाई ने उत्तर प्रदेश की नई स्टार्टअप नीति-2020 के तहत विभिन्न क्षेत्रों में चार स्टार्टअप्स को विपणन सहायता अनुमोदित की
  • प्रत्येक स्टार्टअप को बाजार में न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद लॉन्च करने के लिए विपणन सहायता के रूप में मिलेंगे 5 लाख रुपये

लखनऊ | उत्तर प्रदेश की नवीन स्टार्टअप नीति-2020 के अन्तर्गत् ‘स्टार्ट इन यूपी’ कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय के अधीन अपर मुख्य सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स, श्री आलोक कुमार की अध्यक्षता में नीति कार्यान्वयन इकाई (प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट-पीआईयू) द्वारा आज यहां चार स्टार्टअप्स को विपणन सहायता हेतु अनुमोदन प्रदान कर दिया गया। इन चारों स्टार्टअप्स में से प्रत्येक को बाजार में न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (Minimum Viable Product) लॉन्च करने के लिए एक वर्ष की अवधि में विपणन सहायता के रूप में 5 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।जिन चार स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है, उनमें प्रयागराज का जी सिस्टम, गाज़ियाबाद का एनरे सॉल्यूशंस एलएलपी, सहारनपुर का भूरक टेक्नोलॉजीज तथा लखनऊ का मैटफ्यूज़न वेल्ड प्रा. लि. सम्मिलित हैं, जो क्रमशः कृषि, सौर ऊर्जा, मुखाकृति चिन्हांकन (फेस रिकग्निशन) तथा जैव-ईंधन सेक्टर में स्थापित किए जा रहे हैं।

अवधारणा को परिपक्व करने हेतु प्रारंभिक चरण के वित्त-पोषण के माध्यम से स्टार्टअप्स को समर्थन के महत्व पर बल देते हुए, अपर मुख्य सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स तथा पीआईयू के अध्यक्ष, श्री आलोक कुमार ने कहा कि इस सहायता का मुख्य उद्देश्य नव-निवेशकों को उनके नवाचार व आविष्कारों के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करना है।

श्री आलोक कुमार ने बताया कि उ.प्र. स्टार्टअप नीति-2020 के अन्तर्गत् एक वर्ष में प्रति इनक्यूबेटर 10 स्टार्टअप्स की सीमा के अधीन बाजार में न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद लॉन्च करने के लिए प्रति स्टार्टअप रु. 5 लाख तक विपणन सहायता के रूप में सीड कैपिटल उपलब्ध कराने का प्राविधान है।
इस प्राविधान के अन्तर्गत् सीड कैपिटल तीन किस्तों में माइलस्टोन पर आधारित किश्तों (जैसे 40 प्रतिशत + 30 प्रतिशत +  30 प्रतिशत) में वितरित की जाएगी, जिसमें पहली किश्त अग्रिम के रूप में और शेष दो किश्तों का संवितरण माइलस्टोन पूर्ण होने पर किया जाएगा। पहली किश्त के संवितरण के समय स्टार्टअप द्वारा पीआईयू को अपना कार्य निष्पादन लक्ष्य दिया जाएगा, जिसके आधार पर अनुदान की दूसरी और तीसरी किस्त जारी करने से पहले उनका मूल्यांकन किया जाएगा।
जीएल बजाज इनक्यूबेटर के अधीन विकसित, जी सिस्टम्स की स्थापना प्रयागराज के श्री आशीष कुशवाहा ने ‘फार्मिंग फॉर ऑल’ की अवधारणा से की है। इस स्टार्टअप का उद्देश्य स्वचालित सिंचाई और कृषि से संबंधित अन्य गतिविधियों के लिए मशीन लर्निंग आधारित सेंसर के साथ इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित स्मार्ट फार्मिंग सिस्टम को बढ़ावा देना है। 
गाज़ियाबाद में एनरे सॉल्यूशंस एलएलपी के संस्थापक श्री ऋषभ भारद्वाज ने पेयजल के अपव्यय को कम करने के लिए जल-मुक्त स्वचालित सौर पैनल सफाई प्रणाली का एक प्रोटोटाइप विकसित किया है। स्टार्टअप को टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर – केआईईटी, गाजियाबाद में मार्गदर्शन मिला है। श्री ऋषभ भारद्वाज ने कहा- “हम अपने संगठन को इस प्रोत्साहन के लिए यूपी सरकार को धन्यवाद देते हैं। इस समर्थन के माध्यम से हम अपने लक्ष्य की दिशा में अधिक गति से काम करने में सक्षम होंगे और यह हमें आत्मानबीर भारत के महान लक्ष्य में योगदान करने में मदद करेगा।”

सहारनपुर में भूरक टेक्नोलॉजीज की स्थापना श्री कुमार सत्यम ने की है। स्टार्टअप ने मुख्य रूप से चेहरे की पहचान के माध्यम से बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम का एक प्रोटोटाइप विकसित किया है। स्टार्टअप को टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर – केआईईटी, गाजियाबाद का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है।
मैटफ्यूजन वेल्ड प्रा. लि. को श्री विवेक कुमार द्वारा लखनऊ में स्टार्टअप के रूप में पंजीकृत किया गया है। यह एमिटी यूनिवर्सिटी इनक्यूबेटर के तहत उपयोग के उपरान्त खाना पकाने के तेल को जैव-ईंधन में परिवर्तित करने की अवधारणा पर काम कर रहा है। स्टार्टअप द्वारा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को बायोफ्यूल की आपूर्ति के लिए 10 साल का अनुबंध किया गया है। श्री विवेक कुमार ने कहा- “हम यूपी सरकार के समर्थन और यूपी में स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए आभारी हैं। हमारी योजना अगले वित्तीय वर्ष के भीतर लगभग 100 रोजगार सृजित करने की है।” 
ज्ञात हो कि उ.प्र. स्टार्टअप नीति-2020 में आईटी के साथ ही अन्य सेक्टरों के स्टार्टअप्स को सम्मिलित किया गया है और हाल ही में राज्य सरकार ने उ.प्र. रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति के अन्तर्गत भी स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को भूमि आवंटन की अनुमति प्रदान कर दी है। राज्य सरकार का लक्ष्य राज्य के प्रत्येक जिले में न्यूनतम एक इनक्यूबेटर के साथ 10,000 स्टार्टअप के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। अब तक राज्य में 23 इन्क्यूबेटरों की स्थापना को अनुमोदित किया गया है।पीआईयू की बैठक वीडियो लिंक के माध्यम से आयोजित की गई थी, जिसमें प्रबंध निदेशक, यू.पी. इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन (यूपीएलसी)-श्री ऋषिरेन्द्र कुमार, नोडल एजेंसी-यूपीएलसी के वरिष्ठ अधिकारियों और स्टार्टअप्स के संस्थापकों के साथ-साथ संबंधित इन्क्यूबेटरों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।


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