कर्मचारी समस्याओं के निस्तारण पर सरकार गम्भीर,राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधि मण्डल की शासन से लम्बी वार्ता


कैसलेस चिकित्सा पर शीघ्र कार्रवाई,समयबद्ध समस्याओं का निस्तारण

लखनऊ,। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधि मण्डल ने प्रदेश अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी के नेतृत्व में शासन के आला अफसरों के साथ बैठक कर कर्मचारियों से सम्बंधित लम्बित 16 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा करते हुए शासन के आला अफसरों को तथ्यों से अवगत कराया। इस बैठक में शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव कार्मिक मुकुल सिंघल, विशेष सचिव न्याय रणधीर सिंह, सचिव नियोजन नीना शर्मा, अनुसचिव चिकित्सा, विशेष सचिव वित सरजू प्रसाद मिश्रा, विशेष सचिव ग्राम्य विकास अच्छे लाल यादव, संयुक्त सचिव कार्मिक कु. राघवेन्द्र प्रताप सिंह, अनुसचिव पंचायती राज एवं खाद्य रसद मौजूद थे। इस बैठक में कैसलेस चिकित्सा पर शीघ्र कार्रवाई, कर्मचारियों की समस्याओं के निस्तारण में समयबद्धता के साथ कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति सरकार की गम्भीरता सामने आई। परिषद की तरफ से हरिकिशोर तिवारी के अलावा महामंत्री शिवबरन सिंह यादव, संगठन मंत्री संजीव गुप्ता, संयुक्त मंत्री अविनाश चन्द्र श्रीवास्तव और उप महामंत्री अमिता त्रिपाठी मौजूद थी।

बैठक की जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में पुरानी पेंशन बहाली, 50 वर्षो पर अनिवार्य सेवा निवृत्ति पर कोई कार्यवाही नही किये जाने पर चर्चा हुई। पूर्व प्रेषित जानकारी के आधार पर श्रम विभाग के माली रामपाल प्रकरण में विभाग सहानुभूति पूर्व कार्यवाही करेगा। कैसलेस चिकित्सा पर मुख्य सचिव स्तर पर सर्वोच्च बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार कार्यवाही होगी। भत्तों पर निर्णय शीघ्र लिये जाने के साथ ही बैठक में वेतन विसंगति के मामले में वेतन समिति की सिफारिश का पूरा ध्यान रखा जाएगा। मोटर साइकिल भत्ता विभाग वार समेकित कर वित विभाग के पास भेजा जायेगा। एसीपी में अति उत्तम की व्यवस्था के स्तर पर सामान्य पर 30 मई 19 तक यानि चुनाव आचार संहिता समाप्त होते निर्णय लिया जाएगा। तदर्थ सामायिक अंशकालीन, दैनिक वेतन की विनियमितीकरण के समय पिछली सेवाओं को जोड़कर जेष्ठता का निर्णय विभाग देगा। लेखपाल संवर्ग के प्रकरण पर राजस्व विभाग प्रस्ताव भेजेगा। समयबद्ध कार्यवाही/ सेवा नियमावली में व्यवस्था की जाएगी।

आउट सोर्सिग, संविदा कर्मचारियों के लिए शासनस्तर से नियमावली बनाकर एकरूपता लाई जायेगी। आचार संहिता के बाद रिक्त पदो पर दृ समीक्षा की जाएगी। पदोन्नति के पद न होने पर वित विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। निचले स्तर से उच्च स्तर की पदोन्नतियों पर पदोन्नति के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने हेतु उच्च स्तर पर विचार विमर्श किया जाएगा। कर्मचारी समस्याआंें पर शीघ्र निर्णय के लिए बने विभागीय विवाद समाधान फोरम को सक्रिय किया जाएगा। 2013 की हड़ताल के समय तय चार मांगो पर शीघ्र निर्णय तथा डीआरडीए के कार्मिकों का जीपीएफ,पेंशन, ग्रेच्युटी की वित विभाग स्तर पर निर्णय किया जाएगा। एनएचएम के कार्मिकों को शासन की नीति के सापेक्ष 6000 रूपये मानदेय दिये जाएगा। कर्मचारी कल्याण निगम के कर्मचारियों को शासकीय विभागों में समायोजित कर शीघ्र वेतन आदि का भुगतान किया जाएगा।


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