मनोहर पर्रिकर की तस्वीर बगल में रख गोवा के नए सीएम डॉ. प्रमोद सावंत ने संभाला कामकाज


 

 

पणजी |  देर रात शपथ लेने के बाद गोवा में डॉ. प्रमोद सावंत ने मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाल लिया है। वह सीएम की कुर्सी में बैठ गए हैं, लेकिन उनके बगल की कुर्सी पर रखी पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर की तस्वीर ने सभी का ध्यान खींच लिया। इस तस्वीर के कई मायने हैं। दरअसल प्रमोद सावंत ने गोवा में पर्रिकर की विरासत संभाल तो ली है, लेकिन अपने गुरु की जगह वह नहीं लेना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने कार्यालय में अपने लिए अलग कुर्सी मंगवाई जबकि बगल वाली कुर्सी में मनोहर पर्रिकर की तस्वीर रखी। इसी कुर्सी पर कभी मनोहर पर्रिकर ही बैठा करते थे।

एक वजह यह भी है कि सावंत ने पर्रिकर के मातहत ही उन्होंने राजनीति सीखी थी और वह उनकी पसंद भी थे। सावंत उन्हें अपना गुरु मानते हैं और इसलिए वह उनके मार्गदर्शन लेने के लिए उनकी तस्वीर को बगल में रखना चाहते हैं ताकि सीएम दफ्तर में मनोहर पर्रिकर की मौजूदगी का अहसास हमेशा होता रहे। प्रमोद सावंत ने बताया कि चूंकि इस समय 7 दिन का राष्ट्रीय शोक है इसलिए इस दौरान उन्हें बधाई न दी जाए।

उन्होंने कहा, ‘मैं सभी से विनती करता हूं कि कि 7 दिन के राष्ट्रीय शोक के दौरान न ही मुझे बधाई दें और न ही फूलों से स्वागत करें। मेरे साथ दो डेप्युटी सीएम विजय सरदेसाई और सुधिन धवालिकर भी होंगे। इसके अलावा हम बुधवार को फ्लोर टेस्ट के लिए भी जाएंगे।’ 46 वर्षीय सावंत गोवा में बीजेपी के अकेले विधायक हैं, जो आरएसएस काडर से हैं। वह नेतृत्व के लिए किस तरह से पसंदीदा लीडर थे, इस बात को इससे ही समझा जा सकता है कि जब भी पर्रिकर के विकल्प की बात की गई तो उनका नाम प्रमुख रहा।

सावंत गोवा में बिचोलिम तालुका के एक गांव कोटोंबी के रहने वाले हैं। सावंत का बचपन से आरएसएस से संबंध रहा है। आरएसएस की ओर झुकाव के कारण ही हिंदुत्व की विचारधारा के प्रति उनमें समर्पण आया। उनके पिता पांडुरंग सावंत पूर्व जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। वह भारतीय जनसंघ, भारतीय मजदूर संघ के सक्रिय सदस्य थे। बीजेपी के वफादार कार्यकर्ता के तौर पर उनकी पहचान थी।

पर्रिकर के बीमार होने के बाद वह गोवा में सीएम पद के मजबूत दावेदार बनकर उभरे। वह स्वर्गीय पर्रिकर की भी पहली पसंद थे। उन्होंने खुद सीएम पद की शपथ लेने से पहले कहा है कि उनको राजनीति में लेकर पर्रिकर ही आए थे। उन्होंने स्पीकर और सीएम बनने का श्रेय भी पर्रिकर को दिया है। पार्टी के प्रति उनकी वफादारी भी उनकी सीएम पद की दावेदारी की एक वजह थी।

पार्टी के एक सूत्र ने बताया, ‘सावंत पार्टी के प्रति काफी वफादार थे। वह अपनी किसी भी निजी महत्वाकांक्षा से पहले पार्टी को रखते थे। पार्टी को भी एक कम उम्र के ऐसे नेता की जरूरत थी जो अगले 10-15 सालों तक पार्टी का नेतृत्व कर सके। इसके अलावा पर्रिकर की इच्छा थी कि अगला सीएम कोई भी बीजेपी का विधायक ही हो। इन सब चीजों की वजह से माहौल सावंत के पक्ष में हो गया था।’


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