PM ने वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास और भूमि पूजन किया


लखनऊ: प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  ने श्री काशी विश्वनाथ धाम परियोजना के विकास में हुए विलम्ब पर अपना पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि पिछली सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ होता तो, आज इस परियोजना का शिलान्यास नहीं, बल्कि उद्घाटन होता। श्री काशी विश्वनाथ धाम बाबा भोलेनाथ की मुक्ति का पर्व है। सदियों तक बाबा को सांस लेने में भी दिक्कत होती रही। श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण से बाबा को मुक्ति तो मिलेगी ही, बाबा के भक्तों को विशालता की अनुभूति होगी।
प्रधानमंत्री  आज वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में श्री काशी विश्वनाथ धाम परियोजना का शिलान्यास करने के उपरान्त जनता को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि जिस सपने को एक अरसे से संजोया था, वह आज पूरा हो रहा है। राजनीति में नहीं था तब भी यहां आता था। कई बार आया लेकिन नजर आता कि कुछ करना चाहिए।
प्रधानमंत्री  ने कहा कि आज बाबा के आदेश से सपना साकार होने का शुभारम्भ हो रहा है। चारों ओर दीवारों से घिरे बाबा को सांस लेने में दिक्कत होती थी। अगल-बगल कई मकानों ने घेर रखा था। बाबा के भक्तों को अब विशालता की अनुभूति होगी। करीब 300 प्राॅपर्टी को लेकर जिस प्रकार सहयोग दिया वह अनुकरणीय है। अपनी इस जगह को छोड़कर बाबा के चरणों में समर्पित कर दी। यह काम लोगों ने किया है उनका भी सांसद के रूप में आभार और अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने इसे अपना काम मानकर पूरा किया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी  ने कहा कि 250 साल बाद मेरे ही हाथ श्री काशी विश्वनाथ धाम के विकास एवं सुन्दरीकरण कार्य का शिलान्यास होना लिखा था। उन्होंने वर्ष 2014 में वाराणसी से लोकसभा चुनाव के लिये नामांकन के दौरान दिए अपने उदबोधन ‘मैं आया नहीं मुझे बुलाया है’ का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे बुलावा ऐसे ही कामों के लिए था। मेरा संकल्प मजबूत हुआ है। यह काशी नहीं देश से जुड़ा है। बी0एच0यू0 से आग्रह है कि केस स्टडी करनी चाहिए। काशी हिंदू विश्वविद्यालय इस पर रिसर्च भी करे, ताकि दुनिया को पता चले कैसे लोगों के सहयोग से यह काम हुआ। शास्त्रों के मुताबिक कामों का पूरा पालन किया गया, ताकि आस्था पर खरोच न आए। उन्होंने कहा कि यह नव चेतना का केन्द्र बनेगा, सामाजिक चेतना का यह केन्द्र बनेगा।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री  द्वारा जिस स्थल पर आज आधारशिला रखी गयी है, वहां पर मंदिर का भव्य प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। 39 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में कॉरिडोर का निर्माण होगा। इस कॉरिडोर की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डी0पी0आर0) तैयार हो गई है। मंदिर के सौंदर्यीकरण और विस्तारीकरण पर 380 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंदिर का प्रवेश द्वार 50 फीट से ज्यादा चैड़ा बनाया जाएगा। गलियारे के दोनों तरफ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
परियोजना के अंतर्गत सभी भवनों/दुकानों इत्यादि को सहमति के आधार पर क्रय किया गया है, जिसमें निवसित 500 परिवारों को आपसी सहमति से विस्थापित किया गया है। इन भवनों को क्रय एवं रिक्त कराने के उपरांत प्राप्त सभी मंदिर प्राचीन धरोहर हैं, जो इन भवनों से आच्छादित थे। उन्हें भवनों को ध्वस्त कर मलबा निस्तारण के उपरान्त जनसामान्य को दर्शन पूजन हेतु सुलभ कराया गया है। इन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं सुंदरीकरण का भी कार्य कराया जा रहा है। इन मंदिरों को इस परियोजना का भाग बनाकर इस क्षेत्र को एक अद्भुत संकुल का रूप दिया जाएगा।
इस परियोजना में मंदिर प्रांगण का विस्तार कर इसमें विशाल द्वार बनाए जाएंगे तथा एक मंदिर चैक का निर्माण किया जाएगा। जिसके दोनों तरफ विभिन्न भवन जैसे कि विश्रामालय, संग्रहालय, वैदिक केंद्र, वाचनालय, दर्शनार्थी सुविधा केंद्र, व्यावसायिक केंद्र, पुलिस एवं प्रशासनिक भवन, वृद्ध एवं दिव्यांग हेतु एस्केलेटर एवं मोक्ष भवन इत्यादि निर्मित किए जाएंगे। इस परियोजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा 330 मीटर लम्बाई एवं 50 मीटर चैड़ाई एवं घाट से एलिवेशन 30 मीटर क्षेत्र में निर्माण कराया जाएगा।
प्रधानमंत्री जी ने वाराणसी आगमन के उपरान्त श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन व रुद्राभिषेक किया। प्रधानमंत्री जी ने श्री काशी विश्वनाथ धाम के माॅडल का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक जी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ0 महेन्द्र सिंह, सैनिक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अनिल राजभर, सूचना राज्यमंत्री डाॅ0 नीलकण्ठ तिवारी, सांसद डाॅ0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय सहित जनप्रतिनिधिगण एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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