आरक्षण बिल: राज्य सरकारों की नौकरियों पर भी लागू होगा 10 फीसदी कोटा-रविशंकर प्रसाद


मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसके लाए जाने के समय पर सवाल किया और आरोप लगाया कि यह राजनीति से प्रेरित कदम है। सदन में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने संविधान (124वां) संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए सवाल किया कि ऐसी क्या बात हुयी कि यह विधेयक अभी लाना पड़ा? उन्होंने कहा कि पिछले दिनों तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि इन विधानसभा चुनावों में हार के बाद संदेश मिला कि वे ठीक काम नहीं कर रहे हैं।

भाजपा के प्रभात झा ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले ही भाषण में स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सरकार गरीबों के लिए काम करेगी। यह विधेयक उसी दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि यह सरकार पिछले साढ़े चार साल से लगातार गरीबों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से समाज का एक बड़ा तबका काफी उल्लास में है। उन्होंने कहा कि जब यह विधेयक आया तो सभी अवाक रह गए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक करोड़ों युवाओं से जुड़ा है और करीब 95 प्रतिशत आबादी इस आरक्षण के दायरे में आएगी।राज्यसभा में बुधवार को उस समय एक अप्रत्याशित नजारा देखने को मिला जब राजद के मनोज झा ने सामान्य वर्ग को रोजगार एवं शिक्षा में आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए एक ”झुनझुना दिखाया। झा ने संविधान (124वां संशोधन) विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया कि इस विधेयक के जरिये सामान्य वर्ग को महज एक झुनझुना दिखाया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपने पास से एक झुनझुना निकाल कर दिखाया। राजद सदस्य ने कहा कि यह झुनझुना हिलता भी है और बजता भी है। किंतु सरकार आरक्षण के नाम पर जो झुनझुना दिखा रही है वह केवल हिलता है, बजता नहीं है।

आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने संबंधी संविधान 124वें संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में बुधवार को चर्चा के दौरान अन्नाद्रमुक सदस्यों ने इस विधेयक को ”असंवैधानिक बताते हुये सदन से बहिर्गमन किया। अन्नाद्रमुक के सदस्य ए नवनीत कृष्णन ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुये विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रावधान संविधान के मौलिक ढांचे के सिद्धांत के विरुद्ध हैं, इसलिये यह विधेयक असंवैधानिक है।


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