यूपी में व्यावसायिक सुगमता के लिए नियम कम कियें जाये, प्रदूषण की एन ओ सी अब 30 से 45 दिनों में दी जाये— मुख्य सचिव


प्रदेश में उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रदान करने की अवधि को 120 दिनों से घटा कर 30 से 45 दिनों की अवधि के भीतर किया जाए“”संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव उद्यमियों के आवेदनों एवं शिकायतों के ससमय निस्तारण हेतु निवेश मित्र डैश बोर्ड की नियमित समीक्षा करें“ – मुख्य सचिव, श्री राजेन्द्र कुमार तिवारीउद्यमों से संबंधित अन्य 1300 कानूनों/नियमों की संख्या को कम करने की हो रही कार्यवाही उद्यम संचालन हेतु वांछित विभिन्न स्वीकृतियों के नवीनीकरण की आवश्यकता को समाप्त या आवृति की अवधि में की जाएगी वृद्धि या दी जाएगी स्व-प्रमाणन की सुविधा उद्यमों द्वारा रजिस्टरों व अभिलेखों के रख-रखाव की आवश्यकता को किया जाएगा युक्तिसंगत उद्यमों से संबंधित भौतिक अभिलेखों व रजिस्टरों आदि का होगा डिजिटलीकरण या सरलीकरण

लखनऊ | उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, श्री राजेन्द्र कुमार तिवारी ने वन एवं पर्यावरण विभाग को निर्देशित किया गया कि प्रदेश में उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्रदान करने की समयसीमा को 120 दिनों से घटा कर अन्य राज्यों के सापेक्ष 30 से 45 दिन के भीतर किया जाए, ताकि प्रदेश में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों को एनओसी कम समय में प्राप्त हो सके। 
मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि समस्त संबंधित विभागों द्वारा सिंगल विण्डो पोर्टल, निवेश मित्र के माध्यम से ही उद्यमियों के आवेदन स्वीकार करने के लिए भी शासनादेश जारी किया जाए तथा अपर मुख्य सचिवों/प्रमुख सचिवों द्वारा निवेश मित्र पोर्टल पर प्राप्त यूज़र फीडबैक की मासिक समीक्षा की जाए।
मुख्य सचिव ने यह निर्देश कल शाम लोक भवन में भारत सरकार के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा संस्तुत बिज़नेस रिफाॅर्म एक्शन प्लान-2020 के अन्तर्गत राज्य में ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में सुधार हेतु उद्योगों व उद्यमों की स्थापना व संचालन हेतु आवश्यक विनियामक अनुपालनों के भार को कम करने के उद्देश्य से आयोजित अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।
बैठक में श्रम, गृह (फायर सर्विसेज़), नगर विकास, आबकारी, बेसिक शिक्षा, वन, पर्यावरण तथा न्याय आदि विभिन्न विभागों से संबंधित अनावश्यक नियमों व विनियमों आदि पर तथा ऐसे कानूनों पर जिनको प्रतिस्थापित कर दिया गया है, पर विस्तृत चर्चा की गई तथा निर्देशित किया गया कि औद्योगीकरण हेतु अनुकूल वातावरण के सृजन हेतु यथावश्यकता परीक्षणोपरान्त अप्रासंगिक कानूनों व नियमों को समाप्त करने, विलय करने अथवा संख्या कम करने की कार्यवाही 31 मार्च 2021 तक पूर्ण कर ली जाए।
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, श्री आलोक टण्डन ने सूचित किया कि उन्होंने समस्त संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे उद्यमियों के आवेदनों एवं शिकायतों के ससमय निस्तारण हेतु निवेश मित्र डैश बोर्ड की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, श्री आलोक कुमार ने सूचित किया कि उपर्लिखित कानूनों के अतिरिक्त विभिन्न विभागों में उद्योगों से संबंधित 1300 अन्य अनुपालनों की संख्या को कम करने की कार्यवाही भी विभागीय स्तर पर की जा रही है। इससे भविष्य में उद्योगों की स्थापना एवं संचालन से संबंधित अधिनियमों व नियमों का शिथिलीकरण सम्भव हो सकेगा तथा निवेशोन्मुखी वातावरण के सृजन को गति मिलेगी।
बैठक में निर्णय किया गया कि सिंगल विण्डो पोर्टल निवेश मित्र पर अधिकाधिक सेवाओं को जोड़ा जाए तथा कम जोखिम वाले उद्यमों के संचालन हेतु वांछित विभिन्न स्वीकृतियों के नवीनीकरण की आवश्यकता को समाप्त या आवृति की अवधि में वृद्धि करने या स्वप्रमाणन की सुविधा प्रदान करने हेतु कार्यवाही की जाए। वर्तमान में निवेश मित्र के माध्यम से 25 विभागों की 176 ऑनलाइन सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
इसके अतिरिक्त उद्यमों द्वारा रजिस्टरों व अभिलेखों के रख-रखाव की आवश्यकता को युक्तिसंगत किया जाएगा तथा उद्यमों से संबंधित भौतिक अभिलेखों व रजिस्टरों आदि का डिजिटलीकरण या सरलीकरण किया जाएगा।बैठक में अपर मुख्य सचिव, श्रम-श्री सुरेश चंद्रा, अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा-श्रीमती रेनुका कुमार, अपर मुख्य सचिव, आबकारी-श्री संजय भूसरेड्डी सहित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फायर सर्विस, न्याय आदि विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।


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