प्रदेश सरकार हर बेटी-हर महिला के सम्मान और सुरक्षा करने के साथ-साथ उनके स्वावलम्बन के लिए प्रतिबद्ध है—मुख्य सचिव


मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित कहानी ‘‘माँ’’ से सम्बन्धित ‘‘स्मृतिका’’ का विमोचन 

स्वतंत्रता सेनानी पति के आदर्शों पर पुत्र प्रेम की आहुति देती भारतीय नारी की कथा ‘‘माँ’’ का नाट्य मंचन बहुत ही हर्ष का विषय है,यहां उपस्थित होकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ

लखनऊ। मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी द्वारा संगीत नाट्य अकादमी, उ0प्र0 लखनऊ के सहयोग से सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी द्वारा सन्त गाड्गे प्रेक्षागृह में महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित कहानी स्वतंत्रता सेनानी पति के आदर्शों पर पुत्र प्रेम की आहुति देती भारतीय नारी की कथा ‘‘माँ’’ के नवीनतम नाट्य प्रस्तुति कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी एवं आकांक्षा समिति की प्रदेश अध्यक्षा श्रीमती अर्चना तिवारी, विशिष्ट अतिथि महेन्द्र मोदी, डीजीपी (से0नि0) एवं रेणुका मिश्रा, अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इसके अतिरिक्त मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित कहानी ‘‘माँ’’ से सम्बन्धित एक ‘‘स्मृतिका’’ का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी द्वारा महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित कहानी स्वतंत्रता सेनानी पति के आदर्शों पर पुत्र प्रेम की आहुति देती भारतीय नारी की कथा ‘‘माँ’’ का नाट्य मंचन किया जाना बहुत ही हर्ष का विषय है और वह यहां उपस्थित होकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं रंगमंच से विशेष रूप से सदैव उनका लगाव रहा है। उन्हांेने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने की दृष्टि से मिशन शक्ति नामक व्यापक कार्यक्रम की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर बेटी-हर महिला के सम्मान और सुरक्षा करने के साथ-साथ उनके स्वावलम्बन के लिए प्रतिबद्ध है।  उन्होंने कहा कि माँ के बारे में कुछ बताने की की आवश्यकता नहीं है सभी लोग इससे भली-भांति परिचित हैं।

उन्होंने कहा कि हमने साल में माँ के नाम पर पता नहीं मात्र एक दिन ‘‘मदर्स डे’’ क्यों बनाया है, यह हमारी पाश्चात्य संस्कृति का असर है। उन्होंने कहा कि सब कहते हैं कि आज माँ का दिन है, मुझे कोई बताए वह कौन सा दिन है जो मां के बिन है। उन्होंने कहा कि मां का अपने संतान के प्रति बहुत ही स्नेह होता है वह उनके हित व रक्षा के लिए स्वयं अपने को भी न्यौछावर कर अपने प्राणों की आहूति दे सकती है। उन्होंने मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित कहानी स्वतंत्रता सेनानी पति के आदर्शों पर पुत्र प्रेम की आहुति देती भारतीय नारी की कथा ‘‘माँ’’ के दृष्टिगत कहा कि लेकिन एक मां ऐसी भी जो अपने देश एवं मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने पुत्र का त्याग एवं बलिदान करने में भी पीछे नहीं रहती हैं, मैं ऐसी माँ का वन्दन करता हूँ, नमन करता हूँ। उन्होंने सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी द्वारा अपनी स्थापना के 05 वर्ष की अवधि में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियों को हासिल किये जाने पर बधाई दी।

उन्होंने सोसाइटी की महासचिव श्रीमती सीमा मोदी को सांस्कृतिक कार्यक्रमों व लखनऊ के रंगमंच को आगे बढ़ाने एवं नयी प्रतिभाओं को विकसित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी द्वारा अब तक 05 वर्ष की अवधि में 100 से ज्यादा मंच प्रस्तुतियां एवं 06 थियेटर वर्कशाॅप किये जा चुके हैं। जनपद प्रयागराज, बाराबंकी, बरेली, शाहजहांपुर, कुरूक्षेत्र एवं कुंभ व देश भर के कई नगरों में आयोजित राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के नाट्य आयोजनों में संस्था ने सक्रिय भागीदारी निभाने के साथ ही कई सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त किये हैं। संस्था जहाँ एक ओर रंगमंच के माध्यम से समाज से सीधा संवाद कर रही है तो दूसरी ओर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से स्वयं समाज के मध्य पहुंच कर महिला सशक्तिकरण की योजनाओं उनके कार्यान्वयन, आवश्यकताओं एवं प्रभाव पर प्रकाश डाल रही है।

उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित महेन्द्र मोदी, डीजीपी (से0नि0), श्रीमती रेणुका मिश्रा अपर पुलिस महानिदेशक, नाटक के निर्देशक, समस्त उपस्थित नाट्यप्रेमी बन्धुओं व नाटक के कलाकारों व विशेष रूप से सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी की महासचिव श्रीमती सीमा मोदी जी का विशेष आभार उनको यहां आमंत्रित करने के लिए किया। 


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