राज्य कर्मिकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही


 

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लखनऊ. राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आहवान पर कर्मचारी शिक्षक कर्मचारी मोर्चा के सहयोग से राजधानी के सभी कार्यालयों पर दो दिन की पेन डाउन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। जवाहर इन्दिरा भवन सहित, सिविल चिकित्सालय, वाणिज्यकर भवन में आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों ने अपर जिलाधिकारी निधि श्रीवास्तव के माध्यम से मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन कलेक्ट्रेट में सौंपा।

संगठन के प्रान्तीय अध्यक्ष हरि किशोर तिवरी ने बताया हड़ताल प्रदेश के सभी जनपदों में स्वास्थ्य विभाग के अनर्गत नर्सेज संघ, फार्मेसिस्ट संघ, यू0पी0 लैब टेक्नीशियन एसो0, आप्टोमेट्रिस्ट संघ, सहायक मलेरिया अधिकारी संघ, मलेरिया निरीक्षक सघ, एक्सरे टेक्नीशियन संघ, डेन्टल लइजनिस्ट संघ, फिजियोथिरेपिस्ट संघ, ई0सी0जी0 टेक्नीशियन संघ, मात‘ शिशु कल्याण संघ, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी संघ एवं मेडिकल काॅलेजो आदि संगठन शामिल रहे जिससे प्रदेश के सभी चिकित्सालये में मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

हड़ताल से ये विभाग भी रहे प्रभावित

संगठन के लखनऊ जिला संयोजक बीएस डोलिया ने जानकारी देते हुए बताया हड़ताल के तहत राजस्व विभाग के अन्र्तगत संग्रह अमीन संघ, वाणिज्यकर एसो0, राजस्व अनुसेवक संघ एवं आर0टी0ओ0 कर्मचारी संघ आदि जिनसे सरकार को करोड़ो रुपये की हानि हुई। इसके अतिरिक्त परिवहन विभाग, आई0टी0आई0 संघ, कृषि विभाग, उद्यान विभााग, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, वन विभाग, शिक्षणोत्तर विभाग, समाज कल्याण, सिंचाई विभाग, आई0सी0डी0एस0, स्वास्थ्य भवन, योजना भवन, आवास विकास परिषद, विकास प्राधिकरण पर्यावरण  विभाग,  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सूचना विभाग, गन्ना विभाग, पिकप भवन, खादी ग्रामोद्योग, लोक निर्माण विभाग, जल निगम, वन निमग, निर्माण निगम, बीज निगम, सेतु निगम, नगर निगम, वित्त एवं लेखा प्रशिक्षण संस्थान, कोषागार, सिंचाई विभाग, योजना भवन, आदि विभागों के पेन डाउन हड़ताल से कार्यालय पूरी तरह से ठप रहा। हड़ताल से विकास भवन, जवाहर भवन इन्दिरा भवन के सभी विभागों में कार्य प्रभावित रहा। बुधवार को  प्रदेश के सभी कर्मचारी आकस्मिक सेवाओं को छोड़कर हड़ताल पर रहे कर्मचारियों ने सभी जनपद में जिला अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।

यह हैं कर्मचारियों की मांगें

1- कर्मचारियों के इलाज की व्यवस्था में भ्र’टाचार बंद हो तथा कैशलेस सुविधा प्रदान हो।

2- किसी भी जिलेे में किराये पर मकान निश्चित धनराशि पर ही सभी को मिलता है फिर केन्द्रीय कर्मचारियों को अधिक भुगतान क्यो, इसी प्रकार अन्य भत्ते केन्द्र के समान हो।

3- निगमों में घाटे के जिम्मेदार उच्च अधिकारी@ सरकार की नीतियों है तथा वेतन हमारा काटा जा रहा है। यह व्यवस्था बंद हो।

4- फील्ड कर्मचारी पूरे दिन मोटर साइकिलों से सरकारी कार्य करते है उन्हें साइकिल भत्ता पूरे माह का 100 रूपये मिलता है। इन्हें मोटर साइकिल भत्ता दिया जाए।

5- ठेकेदारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है, इस व्यवस्था को समाप्त करके सीधे नौकरी के रास्ते खोलकर राजेगार दिया जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्री रसोइयों, ग्राम रोजगार सेवकों सहित कार्यरत कर्मियों को राजकीय कर्मी घोषित किया जाये।

6- राज्य कर्मिकों को केन्द्र कर्मियों की तरह समस्त भत्ते दिये जाए।

7- नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल किया जाए।

8- राज्य कर्मिकों को 7,14 और 20 वर्ष की सेवा पर तीन पदोंन्नति पद का ग्रेड वेतन दिया जाए।

9- पूर्व में की गई सेवाओं यथा तदर्थ, अंशदायी, सामायिक, वर्कचाज, दैनिक वेतन, अतिथिवक्ताओं की अवधि को जोडकर पेंशन का लाभ प्रदान किया जाए। पेंशन पूर्व की भाॅति जिस विभाग का कर्मचारी हो उसी विभाग से स्वीकृत किया जाए।

10- उच्च न्यायालय में तय शुदा सफाई कर्मी, संग्रह अमीन, लिपिक संवर्ग एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर यथा आवश्यक आदेश तत्काल जारी किए जाए।


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