नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को महत्वाकांक्षी स्टार्ट अप अभियान को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। इस कार्ययोजना का उद्देश्य जमीनी स्तर पर उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है।
शुरुआती कार्यक्रम का उद्देश्य देश के युवाओं की उद्यमी भावना का उत्सव मनाना है और इस कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रमुख स्टार्टअप के संस्थापक व सीईओ भाग ले रहे हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य बैंकों को स्टार्टअप उपक्रमों के वित्तपोषण को प्रोत्साहित करना तथा उद्यमशीलता और रोजगार सृजन प्रोत्साहन की पेशकश करना भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस अभियान की घोषणा की थी।
कारोबार के नियमों में ढील का वादा
देश में ‘स्टार्ट अप’ कारोबारियों को प्रोत्साहित करने के लिए नियमनों में ढील देने का वादा करते हुए सरकार ने अगले बजट में ऐसे नए उद्यमों में निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर घटाने का संकेत दिया।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पिछले कुछ सालों के दौरान सरकार की भूमिका को एक सुविधा प्रदाता तक सीमित रखने का प्रयास रहा है और अब बाधाएं दूर करने और टैक्स व्यवस्था को अनुकूल बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा, हम उद्यमियों के अनुकूल कराधान व्यवस्था पर पहले ही काम कर रहे हैं। कुछ कदम हैं, जिन्हें अधिसूचना के जरिये उठाया जा सकता है। अन्य के लिए विधायी प्रावधान की जरूरत होगी जो कि बजट के समय वित्त विधेयक के हिस्से के तौर पर आ सकते हैं, ताकि स्टार्ट-अप्स के लिए एक अनुकूल कराधान व्यवस्था का निर्माण हो सके।
स्टार्टअप कारोबारी सम्मेलन में जेटली ने आश्वासन दिया कि बैंकिंग व्यवस्था और सरकार दोनों ही उनके लिए संसाधन उपलब्ध कराएंगी। सम्मेलन में सॉफ्टबैंक के प्रमुख मसायोशी सोन और उबेर के मुख्य कार्यकारी ट्रैविस कलानिक भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा, रिजर्व बैंक और सरकार बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ाने पर मिलकर काम कर रहे हैं।
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