लखनऊ | भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि दूसरों को नसीहत और मशवरा देती बसपा प्रमुख मायावती बेहतर होता महान संत गुरू संत रविदास के आदर्शो पर कुछ तो अमल करती। प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा भारतीय जनता पार्टी संतों, महापुरूषों को सियासत का अंग बनाने की बजाय उनके प्रति श्रद्धा आदर व्यक्त करती है।
सोमवार को श्री पाठक ने बीएसपी द्वारा जारी विज्ञप्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अपने विज्ञप्ति में वे खुद कह रही है कि संत रविदास जी देश की एकता और अखण्डता के पक्षधर थे पर यहां तो बसपा प्रमुख को पं0 जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में पाकिस्तान जिंदाबाद, ‘गो इंडि़या-गो बैक’ और संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरू के समर्थन सहित अन्य राष्ट्र विरोधी नारे लगाने वाले देशद्रोहियों की गिरफ्तारी पहली नजर में ही गलत प्रतीत होने लगती है।
उन्होंने कहा कि बसपा प्रमुख अपने शासन काल में महान संत गुरू रविदास के नाम पर किये गये ढे़रों कामो को गिनाने में जुटी है किन्तु सभी प्राणियो को समान समझकर प्रेम करने के उनके संदेश को वो क्यों नहीं अमल में ला पायी। जातिपाति के फेर के विचार का जिक्र तो करती है, पर अपनी पार्टी में ही जातियों के नाम पर भाई-चारा कमेटी बनाने का काम करती है।
श्री पाठक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को निश्चित मत है कि संत जाति धर्म से ऊपर होते है वे समाज के हर वर्ग से जुड़े होते है भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए रविदास जयंती में भागेदारी करना कोई नई बात नहीं है, वर्ष प्रतिवर्ष समाज में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमो में भागेदारी होेती रही है, हाँ कुछ लोग जो महापुरूषों को भी वोट बैंक के रूप में प्रयोग करना चाहते है वे असहज होते है।
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