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लखनऊ। आर्थराइटिस आॅफ लखनऊ और हेल्थसिटी ट्रॉमा सेन्टर की ओर से योग एवं ध्यान शिविर का आयोजन लोहिया पार्क में किया गया। इस शिविर का शुभारम्भ प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल ने किया। आर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ़ लखनऊ के संस्थापक सदस्य व हेल्थ सिटी अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप कपूर व डॉ. संदीप गर्ग ने बताया कि लखनऊ शहर में लगभग 5 लाख लोग 60 वर्ष के ऊपर हैं और इनमें से लगभग 70 प्रतिशत लोग आर्थराइटिस से पीड़ित हैं। इनमें से तकरीबन 25 प्रतिशत लोगों को तत्काल सर्जरी की आवश्यकता है।
इस अवसर पर डॉ. संदीप कपूर व डॉ. संदीप गर्ग ने कहा कि अब आर्थराइटिस को सहने के बजाए उसके उपचार की आवश्यकता है। डॉ. संदीप कपूर ने बताया कि आर्थराइटिस प्रमुख रूप से शरीर में मौजूद हड्डियों के जोड़ों पर असर करता है और इसका दुष्प्रभाव कई प्रकार से व्यक्ति के पूरे जीवन पर असर करता है। डॉ. कपूर ने बताया कि स्वास्थ्य एक मानसिक स्थिति है और यदि आप सोचते हैं कि आप बीमार नहीं है तो आपको दर्द भी नहीं होगा क्योंकि दर्द भी एक एहसास है।
उन्होंने बताया कि उम्र के साथ शरीर में बदलाव आते हैं और उससे लक्षण भी उत्पन्न होते हैं। काफी हद तक ये लक्षण दवाइयों से कम हो जाते हैं लेकिन दवाइयों का लम्बे समय तक उपयोग करने से शरीर के अंगों में दुष्प्रभाव भी पड़ता है। विशेष तौर से लीवर व किडनी जैसे अंग।
उन्होंने कहा कि समस्या फिर भी बनी रहती है और ऐसे में फिजियोथैरेपी एक कारगर उपाय साबित होता है। योग भी एक प्रकार से आध्यात्मिकता और फिजियोथैरेपी का ही एक संगम है। जो आत्मा और शरीर दोनों पर काम करता है।
डॉ. गर्ग ने कहा कि योगासन फिजियोथैरेपी की तरह है जो कि विभिन्न प्रकार के रोगों में काम करते है। आॅस्टियो-आर्थराइटिस आज जीवन-शैली सम्बन्धित बीमारियों में प्रथम स्थान रखता है। ख़ासतौर पर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में।
डॉ. कपूर ने बताया कि लखनऊ जिले में लगभग 5 लाख व्यक्ति आॅस्टियो-आर्थराइटिस से प्रभावित है तो भारत में यह संख्या लगभग 10 करोड़ है। डॉ. गर्ग ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार 10 में से 7 व्यक्ति आर्थराइटिस से परेशान होते हैं। यह जोड़ों से सम्बन्धित एक बीमारी होती है। बीमारी से ग्रसित व्यक्ति तरह-तरह की परेशानी से गुजरता है। दर्द, चलने-फिरने में कठिनाई, जोड़ों में अकड़न महसूस होना व झुंझलाहट आदि परेशानियाँ होती हैं। मरीज़ यह महसूस करता है कि वह पहले की तरह चीजों को पकड़ भी नहीं पा रहा है। डॉ. गर्ग ने कहा कि बीमारी के जल्द पता लग जाने से इसे न सिर्फ बढ़ने से रोका जा सकता है बल्कि इससे पड़ने वाले दुष्प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।
आर्थराइटिस के उपचार के बारे में बात करते हुए डॉ. कपूर ने बताया कि काफी मरीजों को प्रत्यारोपण सर्जरी से भी लाभ मिला है जिसके बाद मरीज़ सामान्य जीवन भी व्यतीत कर सकता है। आर्थराइटिस होने का मतलब यह नहीं है कि आप सामान्य जीवन व्यतीत नहीं कर सकते। इलाज या प्रत्यारोपण सर्जरी से सामान्य जीवन सम्भव है क्योंकि उपचार माध्यमों में समय के साथ तरक्की भी हुई है। जिसका सीधा फायदा इसके मरीजों को मिलता है।
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