
मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय
लखनऊ। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां लोक भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में वर्तमान पेराई सत्र 2016-17 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य निर्धारित करने के साथ ही ग्राम प्रधानों के वेतन में में चालीस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी साथ कई अहम फैसले लिए है।
मंत्रिपरिषद ने ग्राम प्रधानों के मानदेय तथा अधिकारों में बढ़ोत्तरी का फैसला लिया है। ग्राम प्रधानों के कर्तव्यों एवं दायित्वों में बढ़ोत्तरी एवं उनकी मांगों पर विचार करते हुए मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय लिया गया है। ग्राम प्रधानों के मानदेय में 40 प्रतिशत वृद्धि करते हुए इसे 2,500 रुपए से बढ़ाकर 3,500 रुपए कर दिया गया है। मनरेगा के अनुरूप केन्द्रीय एवं राज्य वित्त आयोग के तहत लिए गए निर्णय के अनुसार 2 लाख रुपए तक के कार्यों की प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति का अधिकार ग्राम सभा को सौंपा गया है। साथ ही, वार्षिक कार्य योजना की स्वीकृति पूर्ण रूप से ग्राम सभा की खुली बैठक में किये जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, यात्रा एवं आनुसंगिक व्यय के रूप में खर्च के लिए अनुमन्य 5,000 रुपए की धनराशि को बढ़ाकर अधिकतम 15 हजार रुपए प्रतिवर्ष किए जाने का भी निर्णय लिया गया है। साथ ही, ग्राम प्रधानों को आकस्मिक खर्च के रूप में 01 हजार रुपए के स्थान पर 5,000 रुपए अपने पास रखने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है।प्रस्तावित वृद्धि इस शर्त के तहत अनुमन्य की गई है कि इन मदों पर व्यय होने वाली धनराशि ग्राम पंचायतें अपनी ग्राम निधि में जमा धनराशि (जिसमें राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर पंचायतों को संक्रमित की जाने वाली धनराशि भी शामिल हैं) में से वहन करेंगी तथा इसके लिए अलग से कोई बजट आवंटित नहीं किया जाएगा।
पाण्टून पुलों पर पथकर वसूली समाप्त करने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने राज्य के विभिन्न मार्गों पर स्थित पाण्टून पुलों पर पथकर वसूली समाप्त किए जाने का निर्णय लिया है। उत्तरी भारत नौघाट अधिनियम-1878 की धारा-15 के तहत पंचायतीराज विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति संख्या-66293गध्33-3-31बी(10)ध्65 दिनांक 23 सितम्बर, 1974 तथा अधिसूचना संख्या-221ध्33-3-232ध्78 दिनांक 05 मई, 1995 को सार्वजनिक नौकाघाटों, जिसमें नौकाओं, पाण्टूनों या बेड़ों का पुल, झूला पुल, उड़न पुल और अस्थायी पुल तथा किसी नौघाट के पहुंच मार्ग और उतराई स्थान पर पथकर की वसूली की जाती है।वर्तमान में राज्य में 67 फेरीध्पाण्टून पुल स्थापितध्प्रान्तीयकृत है। पाण्टून पुलों का प्रयोग ज्यादातर गांव की गरीब जनता द्वारा किया जाता है, जो पथकर देने में सक्षम नहीं होते हैं। इसके दृष्टिगत जनहित में सम्बन्धित विज्ञप्ति एवं अधिसूचना को पथकर की वसूली के लिए लागू न करने का निर्णय लिया गया है।
राजस्व विभाग के लेखपालों को लैपटाॅप एवं स्मार्टफोन मिलेगें
मंत्रिपरिषद ने राजस्व विभाग के लेखपालों को लैपटाॅप, डाटा कार्ड एवं स्मार्टफोन दिए जाने के प्रस्ताव को सैद्धान्तिक अनुमोदन प्रदान कर दिया है। लैपटाॅप एवं स्मार्टफोन की उपलब्धता से लेखपाल अपने कार्यों एवं दायित्वों का गुणवत्तापरक, समयबद्ध, समुचित एवं सुचारू रूप से निर्वहन कर सकेंगे। उपलब्ध कराए जाने वाले लैपटाॅप एवं डाटा कार्ड की विशिष्टितयों का निर्धारण लेखपालों के कार्यों एवं दायित्वों के अनुरूप राजस्व परिषद द्वारा इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग के सहयोग से किया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 के आय-व्ययक में प्राविधानित धनराशि 20 करोड़ रुपए की सीमा तक तत्काल लैपटाॅप व डाटा कार्ड खरीद लिए जाएंगे तथा खरीद की कार्यवाही नियमोंध्शासनादेशों के अनुसार राजस्व परिषद द्वारा की जाएगी। अवशेष लैपटाॅप व डाटा कार्ड वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने पर क्रय किए जाएंगे। क्रय किए जा रहे लैपटाॅपों का आवंटन सम्बन्धित जिलों में कार्यरत लेखपालों की संख्या के अनुपात में राजस्व परिषद द्वारा किया जाएगा तथा जिलाधिकारियों द्वारा लेखपालों को लैपटाॅप का आवंटन ज्येष्ठता के अनुसार किया जाएगा। मंत्रिपरिषद द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए राज्य के सभी लेखपालों को स्मार्टफोन देने के प्रस्ताव को भी सैद्धान्तिक अनुमोदन प्रदान किया गया है। राज्यांश व केन्द्रांश मद में आगामी वित्तीय वर्ष 2017-18 के आय-व्ययक में राजस्व विभाग के सुसंगत अनुदान संख्या व लेखाशीर्षक के अन्तर्गत आय-व्ययक में इसकी व्यवस्था की जाएगी।
एसजीपीजीआई के विभिन्न विभागों के उच्चीकरण के 570.32 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ के विभिन्न विभागों के उच्चीकरण हेतु प्रायोजना लागत 570.32 करोड़ रुपए के अनुमोदन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रायोजना के तहत इमरजेन्सी मेडिसिन क्लीनिकल एवं वाॅर्ड एरिया, सर्जिकल रोबोट, लिवर ट्रान्सप्लाण्ट यूनिट में मेडिकल एवं अन्य उपकरण तथा किडनी ट्रान्स प्लाण्ट सेण्टर का उच्चीकरण किया जाना है।
साथ ही, प्रायोजना की उच्च विशिष्ट श्रेणी की कार्य मदों, 2 मीटर लाँग आॅर्नोमेण्टल पोल, 7 मीटर टेपर्ड आॅक्टागोनल पोल, टफेण्ड ग्लास डोर, स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग विद टफेण्ड रिफलेक्टिव ग्लास, मैटल फाॅल्स सीलिंग, एण्टी स्किड, एण्टी बैक्टीरियल एण्ड एण्टी फंगल, वाॅल फ्लेक्स फ्लोरिंग आदि को भी मंत्रिपरिषद द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है।एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ के विभिन्न विभागों के उच्चीकरण से मरीजों के इलाज, भर्ती एवं आॅपरेशन की तिथि में लम्बी अवधि का इंतजार लगभग खत्म हो जाएगा। साथ ही, एक्यूट हार्ट केयर, ब्रेन स्ट्रोक, गैस्ट्रो इन्टसटाइनल ब्लीड, पिडियाट्रिक इमरजेन्सी तथा इन्फेक्शस डिजीज (जानलेवा बीमारी-स्वाईन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया एवं जीका) आदि का बेहतर इलाज सम्भव होगा। इसी प्रकार किडनी ट्रान्सप्लाण्ट की वेटिंग भी काफी कम हो जाएगी। लिवर ट्रान्सप्लाण्ट के लिए मरीजों को प्रदेश के बाहर नहीं जाना पड़ेगा तथा प्रदेश में पहली बार रोबोट से आॅपरेशन करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी, जिससे मुख्यतः प्रोस्टेट ग्लैण्ड, थायराइड ग्लैण्ड, एड्रीरीनल ग्लैण्ड क्षेत्र में सर्जरी की जाएगी।
170 नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट परियोजना का संचालन
व्यापक जनहित में पी0पी0पी0 माॅडल पर 170 नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट के संचालन के लिए मंत्रिपरिषद ने ‘कोरिजेन्डम टू आर0एफ0पी0’ को अनुमोदित कर दिया है। इस सम्बन्ध में अन्य निर्णय तथा वांछित कार्यवाही पर अग्रेत्तर निर्णय लिए जाने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने का फैसला भी मंत्रिपरिषद द्वारा लिया गया है। ज्ञातव्य है कि 170 नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन प्रदेश के चयनित 36 जिलों में किया जाएगा। इस पर आने वाले व्यय का वहन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मद से किया जाएगा। नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट के तहत प्रत्येक यूनिट में 02 वाहन होंगे, जिसमें 01 वाहन चिकित्सीय उपकरण कार्य के लिए तथा दूसरा वाहन स्टाफ के लिए होगा।
170 नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट में डाॅक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, लैब टेक्नीशियन आदि उपलब्ध रहेंगे तथा दूर-दराज के इलाकों में जनता की मांग पर प्राथमिक उपचार, कम्यूनिकेबल एवं नाॅन-कम्यूनिकेबल बीमारियों की स्क्रीनिंग, बेसिक लैब टेस्ट, टीकाकरण आदि सेवाएं तथा दवाइयां मुहैया कराई जाएंगी। इस सेवा से प्रतिदिन 10 हजार से अधिक रोगियों का उपचार अपेक्षित है एवं साल में लगभग 30 लाख रोगियों को इसका लाभ मिल सकेगा। प्रति यूनिट 07 स्टाफ की तैनाती की जाएगी। इस प्रकार लगभग 1200 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा मंत्रिपरिषद ने जनपद देवरिया के बरियारपुर को नगर पंचायत बनाए जाने का निर्णय लिया है। मंत्रिपरिषद ने वृन्दावन, जनपद मथुरा को प्रथम श्रेणी की नगर पालिका परिषद बनाए जाने का निर्णय लिया है। वृन्दावन शहर एक प्रमुख धार्मिक नगरी है। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी यह पर्यटन का एक प्रमुख क्षेत्र है। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी होने के कारण देश-विदेश से बड़ी संख्या में यहां पर्यटकों का आवागमन रहता है।वृन्दावन में बड़ी संख्या में प्रतिदिन आने वाले भक्तजनों, स्थानीय निवासियों एवं पर्यटकों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा क्षेत्र के समुचित विकास के दृष्टिगत नगर पालिका परिषद, वृन्दावन को प्रथम श्रेणी की नगरपालिका परिषद में उच्चीकृत किए जाने का निर्णय लिया गया है।यही नही मंत्रिपरिषद ने जनपद चन्दौली में नौगढ़ (मुख्यालय-नौगढ़), जनपद पीलीभीत में कलीनगर (मुख्यालय-कलीनगर) व अमरिया (मुख्यालय-अमरिया) तथा जनपद कन्नौज में हसेरन (मुख्यालय-हसेरन) को नई तहसील बनाने का निर्णय लिया है। जनहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से निर्धारित मानकों में शिथिलीकरण प्रदान करते हुए यह निर्णय लिया गया है।
कलान और कुरावली बनेगी तहसील
मंत्रिपरिषद ने जनपद शाहजहांपुर में कलान को नयी तहसील बनाने का फैसला लिया है। इसका मुख्यालय कलान होगा।मंत्रिपरिषद ने जनपद मैनपुरी में कुरावली को तहसील बनाने का फैसला लिया है। नयी तहसील का मुख्यालय कुरावली होगा। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद ने जनपद कानपुर के फूलबाग में 220 के0वी0 उपकेन्द्र के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग के स्वामित्व की 10,000 वर्गमीटर भूमि ऊर्जा विभाग (उ0प्र0 पावर ट्रान्समिशन कारपोरेशन लि0) को निःशुल्क अन्तरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस भूमि को प्रथमतः 90 वर्ष के लिए पट्टे पर (जिसे 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकृत किया जाएगा) दिया जाएगा। इस उपकेन्द्र के निर्माण से कानपुर के फूलबाग, जरीब चैकी, सिविल लाइन्स, परेड इत्यादि क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था बेहतर होगी।मंत्रिपरिषद ने ओबरा-सी 2Û660 मे0वा0 तापीय विस्तार परियोजना की कुल अनुमानित लागत में हुई वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस परियोजना की पूर्व में अनुमोदित कुल अनुमानित परियोजना लागत 8,777.71 करोड़ रुपये (निर्माण अवधि में ब्याज सहित) थी। इसमें 1638.29 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी करते हुए अद्यावधिक अनुमानित परियोजना लागत 10,416 करोड़ रुपये (निर्माण अवधि में ब्याज सहित) कर दी गयी है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पार्किंग व्यवस्था के लिए निःशुल्क
मंत्रिपरिषद ने इलाहाबाद में 6321.37 वर्ग मीटर नजूल भूखण्ड को मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पक्ष में पार्किंग व्यवस्था के लिए निःशुल्क आवंटित करने का निर्णय लिया है।
जनपद इलाहाबाद स्थित सिविल स्टेशन नजूल भूखण्ड संख्या-58-1ध्2 क्षेत्रफल 6321.37 वर्ग मीटर, जिसका वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार कुल मूल्य 33 करोड़ 50 लाख 32 हजार 610 रुपए है, को मा0 उच्च न्यायालय की पार्किंग व्यवस्था हेतु न्याय विभाग के पक्ष में निःशुल्क आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।इसके अलावा मंत्रिपरिषद ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापना में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार (उत्तर प्रदेश) नियमावली, 2016 के प्रख्यापन को मंजूरी प्रदान कर दी है। यह नियमावली ‘भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापना में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013’ की धारा 109 के तहत तैयार की गई हैै। कुल 11 अध्यायों में विभाजित इस नियमावली में 43 नियम तथा 31 प्रारूप संलग्न किए गए हैं।मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक द्वारा ऋणपत्र निर्गमनध्ऋणध्अन्तरिम वित्त अथवा अन्य प्रकार से नाबार्ड से वित्त आहरित करने हेतु शासन द्वारा नाबार्ड के पक्ष में वर्ष 2016-17 के लिए 2700 करोड़ रुपए की शासकीय गारण्टी स्वीकृत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। साथ ही, निबन्धक सहकारी समितियां, उ0प्र0 को पूर्व निर्धारित शर्तों पर वर्ष 2016-17 (1 जुलाई से 30 जून तक) 960 करोड़ रुपए की सीमा तक सभी प्रकार के ऋणपत्रध्निर्गमनध्ऋणध्अन्तरिम वित्त अथवा अन्य प्रकार के वित्त आहरण की स्वीकृति देने का अधिकार भी प्रदान कर दिया है।इस गारण्टी से उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक को नाबार्ड से आसानी से ऋण मिल सकेगा। बैंक द्वारा नाबार्ड से प्राप्त ऋण का वितरण किसानों को किए जाने से कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी, जो कि किसानों के लिए लाभकारी होगी।
अपर निजी सचिवों की नहीं हुई 15 वर्षों से भर्ती
पीआईएनएस
लखनऊ,18 नवम्बर। उ0प्र0 सचिवालय अपर निजी सचिव संघ के अध्यक्ष अमर सिंह पटेल ने बताया कि वर्ष 1999 बैच के अपर निजी सचिवों की नियुक्ति उ0प्र0 सचिवालय में 2001 हुई थी। लगभग 15 वर्ष (2001 के बाद से) बीत जाने के बाद भी अपर निजी सचिवों का चयन नहीं कराया जा सका और तब से लेकर अब तक उ0प्र0 सचिवालय में अपर निजी सचिवों के लगभग 600 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। संघ के अथक प्रसास से अपर निजी सचिवों की भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग को वर्ष 2010 में 250, वर्ष 2013 में 176 एवं वर्ष 2015 में 167 पदों का कुल 593 पदों का अधियाचन भिजावाया गया, परन्तु लगभग 15 वर्ष बाद भी अपर निजी सचिव का चयन नहीं कराया जा सका। यह अत्यन्त खेद का विषय है। उ0प्र0 सचिवालय प्रदेश का सर्वाेच्च कार्यालय है, जहाँ से पूरे उत्तर प्रदेश का संचालन किया जाता है। सचिवालय में अपर निजी सचिवों की इतनी भारी संख्या में पद रिक्त होने से वर्तमान में कार्यरत अपर निजी सचिवों, निजी सचिवों को अपने दायित्वों के अतिरिक्त कार्यों का दबाव पड़ रहा है, जिस कारण उनके स्वास्थ्य पर अत्यन्त बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी विषम परिस्थितियों में कार्य करने को बाध्य अपर निजी सचिवों, निजी सचिवों को अनेक तरह की बीमारियाँ हो रही हैं।उन्होंने बताया कि उन्होंने अपर निजी सचिव की चयन प्रक्रिया जल्द से जल्द पूर्ण कराने के लिए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिवालय प्रशासन विभाग को पत्र लिखा गया है। साथ ही चयन प्रक्रिया शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण कराने हेतु लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सचिव को भी पत्र भेजा भेजा गया है।
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