यूपी का स्टेट हाइवे घोटाला : लखनऊ पुलिस ने हाथ खड़ा किया, भ्रष्ट नौकरशाह ने दिल्ली संपर्क साधा


 

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Surya Pratap Singh

उ.प्र. में सत्ता हाथ से खिसकता देख महाभ्रष्ट, काले चेहरों की ‘चमड़ी’ बचाने की कवायद! ‘फोर लेन’ निर्माण घोटाला… मामला ‘अति’ गम्भीर है… सरकार को लगा रु. 1200 करोड़ का चूना! ‘दिल्ली-यमनोत्री’ स्टेट हाइवे घोटाले में राज्य सरकार के आकाओं के नाम आने पर लखनऊ पुलिस ने जांच करने से मना किया और इस बड़े घोटाले को दबाने / ठंडे बस्ते में डालने के लिए इस जांच को ‘आर्थिक अपराध शाखा (EOW)’ को सौंपने के लिए पत्र भेज दिया।

‘उपशा’ ने FIR में पहले सभी आरोप बैंक व कम्पनी पर मढ़ने की कोशिश और अब घोटाले को दबाने का प्रयास हो रहा है। SEW-SSY नामक इस फ़र्म में कांग्रेस के बड़े दक्षिण भारतीय नेता, पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे का नाम director के रूप में आ रहा है। घोटाले में ‘AY-NS Syndicate’ तथा अब बाबरी मस्जिद गिरने के काल में प्रधानमंत्री रहे कांग्रेस के बड़े नेता का नाम आने से मामला अत्यंत गम्भीर हो गया है।

बिना काम के सरकारी पैसा खाने का रु. 5000 करोड़ का लघु सिंचाई विभाग का घोटाला हाल में ही सामने आया था, जब लघुसिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह ने इस मामले को दबवा दिया गया था। इसी प्रकार का उक्त ‘हाई प्रोफ़ायल’ घोटाला सामना आने से सैफ़ई के सपाईयों के होश उड़ गए है।

आज पता चला है कि कांग्रेस के बड़े नेता के लड़के का नाम आने से दिल्ली में बेठे कुछ उनके सत्ताधीश आका भी इस मामले को दबाने में लग गए हैं। ‘AY-NS syndicate’ के NS के नाम से कुख्यात नौकरशाह ने दिल्ली के सत्ताधीशों में भी घुसपैठ बनाने की कोशिश की है….दिल्ली में सत्ता के नज़दीक एक पूर्व पंजाबी मुख्यमंत्री के बेटे का भी नाम इसमें आ रहा है।

इस बड़े घोटाले में क़ानून को ठेंगा दिखाने वाले ‘नेता-नौकरशाह-पूंजीपति’ का ऐसा लुटेरा-गिरोह सामने आया है, जिसे बिना प्रधानमंत्री मोदी के सीधे हस्तक्षेप के तोड़ना मुश्किल होगा। ‘लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे’ के रु. 30,000 करोड़ के घोटाले के साथ-साथ, रु. 1735 करोड़ के उक्त ‘दिल्ली-यमनोत्री’ राजमार्ग घोटाले की जाँच CBI से कराए बिना बड़े भ्रष्ट नेताओं व नौकरशाहों के नाम उजागर करना असम्भव होगा।

उत्तर प्रदेश का NRHM घोटाला रु. 10,000 करोड़ का था जिसमें मंत्री व बड़े नौकरशाह जेल में हैं। उत्तर प्रदेश में ‘भर्ती-घुटाला’: विभिन्न पदों पर UPPSC (कुख्यात अनिल यादव), अधीनस्थ चयन सेवा आयोग व पुलिस भर्ती घोटालों की जाँच भी CBI के हवाले होनी चाहिए। ‘नक़ल माफ़िया’ व ‘खनन माफ़िया’ द्वारा युवाओं व पर्यावरण के साथ किए गए खिलवाड़ व मचाए भ्रष्टाचार की जाँच भी CBI को सौंपना चाहिए। ‘बिजली विभाग’ में पिछले पांच वर्षों की प्राइवट कम्पनियों से बिजली व उपकरणों की ख़रीदारीयाँ, नक़ली अनुबंध, कम्प्यूटर आदि घोटालों की जाँच CBI को करनी चाहिए।

विकास प्रधिकरणों, नॉएडा/ग्रेटर नॉएडा में भूमि आवंटन व भूउपयोग परिवर्तनों में हुए लगभग रु. 10 लाख करोड़ के घोटालों को सबसे पहले पकड़ा जाना चाहिए। आप बताइए, क्या इन उक्त सभी घोटालों की जाँच CBI से होनी चाहिए या नहीं? इतने प्रभावशाली लोगों के ख़िलाफ़ क्या आने वाली सरकार CBI जाँच की सिफ़ारिश करेगी. देखते हैं, 11 मार्च के बाद आने वाली सरकार क्या करती है?

संलग्न चित्र में सपा के कार्यकाल में जन्मे व पले-पोसे भ्रष्ट-कुख्यात चेहरों को ध्यान से देखें और जब भी मौक़ा मिले इनका सार्वजनिक प्रतिकार करें!

यूपी के चर्चित आईएएस अधिकारी डा. सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से


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