
लखनऊ | लखनऊ मे राेज बढते अपराधाें से ऐसा लगने लगा है कि वरिष्ठ अधिकारियाें का पुलिस पर नियंत्रण नही रह गया है. राेज हत्या, डकैती, लूट, चेनस्नेचिग, छेडखानी की घटनायें लगभग हर थाने मे हाे रही है . जिसका शिकार आम जनता बन रही है .
इतना ही नही बीच बीच मे जिस तरह से कुछ पुलिस कमियाें के कारनामे सामने आ रहे है, उससे रछक पुलिस की जगह भछक पुलिस का चेहरा सामने आ रहा है. अभी पिछले दिनाें ही एक बिल्डर से मिल कर कुछ पुलिस वालाें ने एक डाक्टर काे फजी मामले मे फंसा कर उससे एक कराेड की वसूली की . आज ही चिनहट पुलिस के एक दाराेगा से परेशान हाे कर एक टीचर ने सीएम. याेगी काे पत्र लिख कर आत्महत्या करने की काेशिश की .
एक और चचित मामले शवण साहू कांड मे कुछ पुलिस कमियाें की भूमिका ने लखनऊ पुलिस की छवि काे काफी दाग लगाया .
इऩ सारी घटनाओ मे दाेषी पाये जाने पर पुलिस कमियाें काे दंडित किया गया पर इनके काऱण जाे पुलिस की छवि धूमिल हुई है उसे वापस जल्दी नही लाया जा सकता है.
इन घटनाओ काे देखने के बाद एक बात साफ है कि लखनऊ के आला अधिकारियाें का पुलिस पर नियंत्रण नही रह गया है. उनकाे अपने अफसराें का काेई भय नही है तभी वह मनमानी करने पर उतारू है .
लखनऊ मे वतमान मे पिछली सरकार के पहुंच वाले अफसर व थानाें मे थानेदार तैनात है जाे अभी भी अपने ही ढग से काय कर रहे है . सीएम. याेगी ने भले ही पुलिस के आला अफसराें काे अपऱाधाें पर कंटाेल करने की चेतावनी दी है लेकिन जब तक लखनऊ पुलिस मे पिछली सरकार के सिफारिशी थानेदाराें व अफसराें काे पूरी तरह से नही बदला जायेगा तब तक पुलिस का चेहरा याेगी सरकार के अनूरूप नही बन सकेगा .
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