
महंगी बिजली खरीदने वाले 5 उत्पादन गृह पर नियामक आयोग ने सुनाया फैसला
कैपिटल कास्ट में रू. 227 करोड़ की की कटौती, फिक्स चार्ज की दरों में 39पैसे प्रति यूनिट की कमी
लखनऊ, । उत्तर प्रदेश में सबसे महंगी बिजली पैदा करने वाले हाई प्रोफाइल उत्पादन गृह बजाज एनर्जी के कुल 5 उत्पादन गृहों खम्बनखेडा, बरखेडा, मकसूदपुर, कुन्दरकी और उतरौला जिनकी कुल 450 मेगावाट क्षमता है के कैपिटल कास्ट व टूऊ.अप के संबंध में लम्बे समय से नियामक आयोग में सुनवायी के बाद फैसला रिजर्व था। आयोग अध्यक्ष देश दीपक वर्मा व सदस्य एस.के. अग्रवाल ने 144 पन्ने का फैसला सुना दिया है, जिसमें बजाज एनर्जी को कड़ी फटकार लगाते हुए उस पर अनेकों तल्ख टिप्पणी की है।
बजाज एनर्जी द्वारा पांचों उत्पादन गृहों की कुल प्रोजेक्ट कास्ट रू. 2569.80 करोड़ याचिका में दी गयी थी। उसके बाद बजाज द्वारा पुनरू उसमें अतिरिक्त प्रोजेक्ट कास्ट रू0 155 करोड़ और शामिल किया गया था। याचिका में आपत्तिकर्ता के रूप में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा द्वारा लगातार कड़ा विरोध किया जा रहा था। सुनवाई में लिखित आपत्ति दी जा रही थी। उपभोक्ता परिषद द्वारा बजाज से अनेकों कागज आयोग आदेशानुसार मांगे जा रहे थे, जिसे बजाज कम्पनी द्वारा बड़ा स्कैन्डल खुलने के डर से नहीं दिया गया। नियामक आयोग ने बजाज एनर्जी की कैपिटल कास्ट में लगभग 72 करोड़ की कटौती करते हुए उसे 2497.97 करोड़ अनुमोदित किया और वहीं 155 करोड़ अतिरिक्त प्रोजेक्ट कास्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया। सब मिलाकर बजाज की कैपिटल कास्ट में कुल 227 करोड़ की कटौती की गयी है। नयामक आयोग द्वारा जारी अपने आज के आदेश में अभी तक बजाज एनर्जी द्वारा वसूल की जा रही फिक्स चार्ज रू. 2.24 से रू. 2.34 प्रति यूनिट में कटौती करते हुए अब उसे रू. 1.88 से रू.1.95 प्रति यूनिट कर दिया गया है, जिससे बजाज एनर्जी जिस दर पर बिजली पावर कार्पाेरेशन को बेचता है, उसमें लगभग 36 से 39 पैसा प्रति यूनिट की कमी हो जायेगी। चूंकि यह आदेश 2011.12 से लागू होगा, ऐसे में करोड़ों रूपया बजाज एनर्जी को पावर कार्पाेरेशन को वापस भी करना होगा।
जिसका लाभ भविष्य में उपभोक्ताओं को मिलेगा। फैसला आते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग अध्यक्ष देश दीपक वर्मा व सदस्य एस.के.अग्रवाल से मुलाकात कर यह आपत्ति दर्ज करायी कि बजाज ग्रुप की ही एक इनहाउस कम्पनी बजाज इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेन्ट कम्पनी लि. बिडको है जिसको बजाज एनर्जी द्वारा व्वायलर टरबाइन व कोल हैडलिंग के अनेकों कार्य महंगी दर पर दिये गये हैं और बजाज ग्रुप की इसी कम्पनी द्वारा दूसरी कम्पनियों को यह कार्य सस्ती दरों पर सबलेट कर दिया गया है जिससे बजाज एनर्जी को बड़ा फायदा हुआ और उसी की वजह से कैपिटल कास्ट में करोड़ो रूपये बढ़ोत्तरी हुई, से सम्बन्धित सभी कागजात आयोग के आदेशानुसार बजाज कम्पनी द्वारा उपभोक्ता परिषद को सौंपा जाना था, जो नहीं सौंपा गया।
ऐसे में बजाज की कैपिटल कास्ट में करोड़ों की और कटौती होनी चाहिए, जिस पर आयोग पुनर्समीक्षा करे। उन्होंने कहा कि बजाज एनर्जी की कैपिटल कास्ट में और कटौती कराने के लिये पावर कार्पाेरेशन के उच्चाधिकारियों व राज्य सरकार से अनुरोध किया जायेगा कि आयोग के सामने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाये। जिसमें उपभोक्ता परिषद भी पुनर्विचार याचिका में पुनरू अनेकों विधिक आपत्तियां पेश करेगा, जिससे बजाज एनर्जी की दरों में और कटौती होगी और लगभग 300 करोड़ रूपया कैपिटल कास्ट में कमी तय है।
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