
लखनऊ | दलाल राेहित सहाय की लाईफ की कहानी बिल्कुल थिंलर पिक्चर जैसी है, जिसमे नेता है, ब्यूराेकेसीं है, धाेखा है और फरेब भी है . आईबी की जॉच मे राेहित के जीवन की पुरानी परतें खुलने लगी है . कांगेस, सपा ,बसपा और भाजपा के नेताओ से भी उसके गहरे सम्बन्धाें के बारे मे पता चला है .
जानकारी के अनुसार राेहित सहाय काे इस समय दिल्ली के एक बडे टीवी पत्रकार का संरक्षण मिला हुआ है , जिसकाे नाेयडा मे उसने कराेडाें रूपये की एक काेठी तक दिलाई है . इतना ही नही दिल्ली व नाेयडा मे कई लाेगाें के साथ उसका लेनदेन का भी लफडा चल रहा है जिसमे एक अखबार लाईन के टॉप बॉस भी शामिल है . बताया जाता है कि इन टॉप बॉस का कराेडाें रूपये राेहित पर इधर उधर करने का आराेप है .
आईएएस अफसराें की दलाली करने वाला राेहित सहाय जब लखनऊ मे था ताे उसने पहले रिलांयस मे नाैकरी की उसके बाद वह एक रीयल इस्टेट कम्पनी से जुड कर उसका काम देखने लगा था . उस समय यूपी मे मायावती की सरकार थी . रीयल इस्टेट क. केे मालिक ने एक काम के बदले कई कराेड रूपये सरकार से जुडे एक नेता काे पहुंचाने के लिए दिया लेकिन यह फंड उस नेता तक नही पहुंचा .
आईबी सूत्राें के अनुसार , राेहित ने यह पैसा वहां पहुंचाया ही नही और नाैकरी छाेड कर गायब हाे गया . उसके बाद जब लाेकसभा का चुनाव हुआ ताे उसने यूपी कांगेस की एक महिला नेता व एक दिल्ली के नेता के चुनाव की फंडिग कर उनके करीब पहुंच गया . राेहित के सपा के कई नेताओ से बडे करीबी सम्बन्धाें के बारे मे पता चला है. बताया जाता है कि उसने सीएम के करीब तक पहुच बनी ली थी . इसके बाद राेहित ने दिल्ली की ओर अपना रूख किया और दलाली का नेटवक चलाने लगा .
यही पर उसने सीबीआई व ईडी मे फंसे अफसराें व नेताओ की पैरवी करनी शुरू की बताया जाता है कि वह अपने माेबाईल नम्बर हर पन्दह दिन मे बदलता रहता है .
बरहाल , वह आईबी की नजर मे है ,उसके साथ ही साथ उसने जुडने वाले नेता व आईएएस अफसर भी रडार पर है .जल्द ही बडी हलचल मच सकती है जिसमे नेताओ, आईएएस अफसराें के गठजाेड का नया खुलासा हेा सकता है .
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