
भ्रष्टाचार मे लिप्त व सपा सरकार के खास रहे अफसराें काे चुन चुन कर बैठा रहे है केशव प्रसाद मौर्य
लखनऊ.यूपी के डिप्टी सीएम. व लाेक निर्माण मंत्री केशव प्रसाद मौर्य अपने विभाग के महत्वपूण पदाें पर भ्रष्टाचार मे लिप्त व सपा सरकार के खास रहे अफसराें काे चुन चुन कर बैठा रहे है . सेतु निगम के बनाये गये एमडी राजन मित्तल का भी काफी काला इतिहास रहा है ,इन्हाेने फर्जी एफडीआर पर ही 1200 कराेड रूपये का टेंडर अखिलेश यादव के खास लाेगाें काे दे दिया था .
इससे पहले यूपी आरआरएन मे विश्वदीप काे मंत्री जी कायवाहक एमडी का चाज दे चुके है .
हम बाद करते है राजन मित्तल की .
लोक निर्माण क्षेत्र आगरा के चीफ इंजीनियर रहे राजन मित्तल ने सेतु निर्माण निगम के एमडी के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। राजन मित्तल की उपलब्धियों के बारे में बात करें तो हाल ही के दिनों में मित्तल आगरा के जाने माने तेल कारोबारी को रातों रात बड़ा ठेकेदार बना आए हैं। इतना ही नहीं मित्तल ने इस नए नवेले ठेकेदार को 1200 करोड़ का ठेका देने में भी तमाम नियमों और सरकारी मानकों को ताक पर रख दिया।
13 जुलाई 2016 में आगरा पहुंचे राजन मित्तल के बारे में बताया जाता है कि ये शिवपाल यादव के बेहद करीबी थे। शिवपाल यादव ने आगरा में आए कुछ बड़े प्रोजेक्टों को अपने करीबियों की कंपनियों को देने के लिए इनकी नियुक्ती आगरा में की थी। लेकिन सीएम अखिलेश यादव से हुई लड़ाई में शिवपाल यादव को मुंह की खानी पड़ी और मित्तल ने अखिलेश यादव के इशारे पर सरसों तेल के कारोबारी शिवकुमार राठौर की कंपनी को 1200 करोड़ के टेंडर दे डाले।
सूत्रों की माने तो राजन मित्तल ने तेल का कारोबार करने वाले राठौर के भाई देवेंद्र राठौर की कंपनी आरपी इंफ्रावेंचर को 800 करोड़ का पहला टेंडर दिया। इस टेंडर को लेने के लिए आरपी इंफ्रावेंचर के पास न तो आवश्यक अनुभव था और न ही अन्य योग्यताएं जो लोकनिर्माण विभाग के टेंडरों में नियमों का हिस्सा रहतीं हैं। इसके मित्तल ने जो सबसे बड़ा कारनामा किया वो था टेंडर के लिए जमा होने वाले 25 करोड़ के फर्जी एफडीआर को स्वीकार करना।
नियमानुसार किसी भी टेंडर के लिए केवल एसबीआई या फिर उसकी सहायक किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से जारी होने वाले ही एफडीआर को ही स्वीकार किया जाता है। इसके बावजूद राजन मित्तल ने नियमों को ताक पर रखकर कोआॅपरेटिव बैंक से बनवाई गई 25 करोड़ की फर्जी एफडीआर को स्वीकार करते हुए मथुरा—आगरा के बीच 800 करोड़ के सड़क निर्माण प्रोजेक्ट के लिए आरपी इंफ्रावेंचर के साथ अनुबंध कर लिया।
इसके बाद मित्तल और आरपी इंफ्रावेंचर के बीच टेंडर देने का सिलसिला जारी रहा। मित्तल ने बरसाना, गोवर्धन और डींग में सड़क निर्माण के लिए निकले 458 करोड़ के ठेके भी आरपी इंफ्रावेंचर को दे डाले। इन ठेकों में भी वही प्रक्रिया अपनाई गई।
मित्तल द्वारा राठौर भाईयों को ठेकेदार बनाने के लिए दी गई सहूलियतों का एक कारण तो उनके अखिलेश यादव से संबन्ध थे तो दूसरा कारण था मित्तल का भ्रष्टाचार व्यक्तित्व। मित्तल ने जिस तरह से आरपी इंफ्रावेंचर को लाभ पहुंचाया उसके लिए उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह छुपाया है। उन्होंनें अपने पद का दुर्उपयोग किया है। जिसे कानूनी तौर पर अपराध और भ्रष्टाचार के मामले के रूप में देखा जाना चाहिए।
मित्तल के जिन कारनामों की जांच होनी चाहिए थी आज वही कारनामे उनकी कामयाबी की सीढ़ी बन गए हैं। जो केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश भर में भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के दावे कर रहे थे वही मौर्य सत्ता में बड़ी कुर्सी मिलने के बाद अपने ही महकों में ढूंढ़ ढूंढ़कर एक से एक भ्रष्टाचारी अधिकारियों को ऊंची से ऊंची कुर्सी पर बैठा रहे है।
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