सिंगरौली-सोनभद्र में प्रदूषण फैलाने वाले प्रतिष्ठानों पर गिरेगी गाज


 

13_12_2017-ngt

सिंगरौली-सोनभद्र में प्रदूषण के हालात जानने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की कोर कमेटी शीघ्र दौरा करेगी। इस दौरान कोर कमेटी औद्योगिक प्रतिष्ठानों व प्रशासन द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाये गये कदमों की भी समीक्षा करेगी साथ ही यदि कोई औद्योगिक प्रतिष्ठान अथवा प्रशासन एनजीटी के निर्देशों का अनुपालन न करने का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की अनुसंशा भी करने की जिम्मेदारी कोर कमेटी को सौंपी गयी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने चार सप्ताह के भीतर यह कार्रवाई करने के आदेश याचिका संख्या 276/2013 का निस्तारण करते हुए जारी किये हैं।

एनजीटी ने सिंगरौली-सोनभद्र में भारी प्रदूषण पर प्रभावी रोकथाम के लिए वर्ष 2014 में एक हाईपावर कोर कमेटी का गठन किया था जिसमें अंतरिम रिपोर्ट जुलाई 2014 में एनजीटी के समक्ष रख दी थी। कोर कमेटी और उसकी पांच सब कमेटियों ने क्षेत्र में गहन जांच के बाद अपनी फाइनल रिपोर्ट 20 अगस्त 2015 को सुपुर्द कर दी थी जिसमें सड़क से कोयले का परिवहन पूरी तरह रोकने से लेकर वायु जल एवं मृदा के नमूनों की जांच के लिए उच्चस्तरीय लैब, स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों की जांच के लिए विशेष चिकित्सकों से उक्त चिकित्सालय आदि की स्थापना प्रमुख थी।

एनजीटी का मानना है कि किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान अथवा प्रशासन द्वारा अनुशंसाओं पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गयी। इसलिए कोर कमेटी की संस्तुतियों को अब मुकम्मल तौर पर लागू किया जाये। एनजीटी की इस कोर कमेटी के अतिरिक्त दो अन्य कमेटियों का भी गठन किया गया है जिनमें कोर कमेटी की अनुशंसाओं को अब सिंगरौली और सोनभद्र में मुकम्मल ढंग से लागू करवाना होगा। दोनों प्रदेशों के पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता में गठित इन कमेटियों का संयोजन जिला अधिकारियों को सौंपा गया है जो महीने में एक बार बैठक कर हालात की रिपोर्ट कोर कमेटी को सौपेंगे। कोर कमेटी एनजीटी के समक्ष प्रत्येक तीन माह में प्रदूषण पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।


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