बाढ़ और सूखा करीब,सिंचाई विभाग में मुख्य अभियंता के 23 पद रिक्त ,दोहरी कार्यप्रणाली की चाह में सीएम का जनपद भी मुख्य अभियंता विहिन


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लखनऊ,। किसानों की आय दो गुना करने का दावा करने वाली भाजपा सरकार लगता है बाढ़ और सूखा को लेकर चितिंत नही है। तभी तो बाढ़ और सूखा कार्यो की योजना प्रस्ताव बनाने वाले सिंचाई विभाग के कार्यो की धुरी कहे जाने वाले मुख्य अभियंता स्तर दो के स्वीकृत पद 37 में से 23 पद रिक्त है। यही नही सीएम के गृह जनपद जिसमें गडक जैसी बड़ी नदी है वहाॅ भी मुख्य अभियंता स्तर दो का पद रिक्त चल रहा है।

लगता है भाजपा सरकार भी सपा सरकार की तरह काम चलाऊ व्यवस्था पर काम करने जा रही है। एक तरफ सरकार की प्राथमिकता में किसान शामिल है वही दूसरी तरफ किसानों से सीधे सम्बंध रखने वाले विभाग में दोहरे कार्यभार के खेल की पथकथा लिखी जा रही है। सिंचाई विभाग में मुख्य अभियंता सिंचाई कार्यो की धुरी कहा जाता है लेकिन यहाॅ तो इस संवर्ग को हाशिये में खड़ा कर दिया गया है। विभाग में मुख्य अभियंता स्तर दो के स्वीकृत पद 37 है लेकिन वर्तमान समय में गोमती रिवर फ्रट घोटाले में निलम्बित एक मुख्य अभियंता के बाद यहाॅ मात्र 14 मुख्य अभियंता कार्यरत है यानि की 23 पद रिक्त है। अब प्रश्न यह उठता है कि जब इंजीनियर पदोन्नति के लिए आदेश होने के बावजूद आठ नौ माह तक वंचित रहेगें तो निश्चित ही वे कुठित होकर काम करेगें और इसका सीधा प्रभाव किसानों पर पड़ेगा।

एक तरफ जहाॅ मुख्य सचिव पदोन्नति को लेकर लगातार विभागों पर दबाव बनाए हुए है वही सिंचाई मोहकमा के आला अफसर और सचिवालय के चंद अधिकारियों के काकस के आगे मुख्य सचिव के पदोन्नति सम्बंधी आदेश सिंचाई विभाग में बेकार साबित हो रहे है।

इस सम्बंध में मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने 31 अगस्त 2017को समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिवों को अपने अधिनस्थ विभागोें में डीपीसी कार्यवाही सिंतम्बर तक पूरा करने के निर्देश दिये थे। इसके उपरान्त माह नवम्बर तक तीन अनुस्मारक मुख्य सचिव स्तर पर भेजे गए। लेकिन सिंचाई विभाग को शायद इन आदेश की कोई परवाह नही है। जबकि वर्तमान समय में सिंचाई विभाग के अफसरों पर वर्तमान में बाढ़ क्षेत्र में बाढ़ पूर्व तैयारियों तथा सम्भावित सूखा के दृष्टिगत सूखा प्रबंधन के लिए योजनआों को कार्यनन्वित कराने की जिम्मेदारी है। ऐसे में इस बाॅत का अन्दाजा आसनी से लगाया जा सकता है कि भले ही इंजीनियर संवर्ग खुलकर इसका विरोध न करे लेेकिन अन्दरूनी तौर से कुठित इंजीनियरों की कार्यप्रणाली जरूर सुस्त रहेगी।

यही नही वर्षो से लम्बित सरयू जैसी अतिमहात्कांक्षी परियोजना की बाॅत करे या फिर अन्य ंिसंचाई परियोजनाओं का प्रभावित होना तय है। वर्तमान में चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने के लि पूर्ण कालिक मुख्य अभियंताओं की तैनाती अति आवश्यक है। ऐसे में एक बार फिर पुरानी सरकार की तरह अगर काम चलाऊ व्यवस्था के तहत दोहरी कार्यभार की व्यवस्था की गई तो महत्वपूर्ण कार्यों का सम्पादन प्रभातिव होगा और दोहरे कार्यभार के चलते इंजीनियर शासन को उलझाएगें और उलझे रहेगेे। सूत्र यह भी बताते है कि कुछ इंजीनियर दोहरे चार्ज के चक्कर में डीपीसी नही होने दे रहे है। शासन के अधिकारियों को मिलाकर जानबूझकर उक्त फाइल मुख्य सचिव के समक्ष नही प्रस्तुत करने दे रहे है।


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