
lucknow : उत्तर प्रदेश में अपराध की समस्या काफी लंबे समय से बनी हुई है। इसलिए अपराधियों पर नकेल कसने के लिए लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विधानसभा में ‘मकोका’ की तरह ‘यूपीकोका’ को मजूरी दी है। हालांकि पिछले साल 21 दिसंबर को भी यूपीकोका बिल पास हो गया था, मगर विपक्ष के विरोध के चलते इसे सदन की प्रवर समिति के पास भेजा गया था।
4 महीने के बाद दोबारा योगी सरकार ने विधानसभा में यह बिल पेश किया और मंगलवार को यूपी विधानसभा में यह विधेयक पारित हो गया है। इस कानून के अंतरगत जबरन वसूली, जबरन मकान और जमीन पर कब्जा, वेश्यावृत्ति, फिरौती, धमकी, तस्करी, जैसे अपराधों को शामिल किया गया है।
महाराष्ट्र के बाद अब उत्तर प्रदेश दूसरा राज्य बन गया है। यूपीकोका का मतलब है कि उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट के तहत कई प्रावधान आते है।
1. इस कानून के अंतरगत गिरफ्तार व्यक्ति को 6 महिने तक जमानत नहीं मिलेगी।
2. इस कानून में केस तभी दर्ज जब आरोपी कम से कम दो अपराधों में शामिल होगा और उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई हो।
3. आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने का समय पहले 60 से 90 दिनों का था मगर इस कानून के तहत 180 दिन का समय कर दिया है।
4. यूपीकोका कानून के तहत आरोपी को पुलिस 30 दिनों के लिए ले सकती है।
5. इस कानून में आरोपी को कम से कम पांच साल की सजा मिल सकती है और इसमें फासी की सजा का भी प्रवधान शामिल है।
इस सख्त यूपीकोका कानून का गलत इस्तेमाल ना हो इस के लिए भी अलग से नियम बनाए गए है।
1. राज्य स्तर पर एेसे मामलों की जांच मॉनिटरिंग गृह सचिव किया करेंगे।
2. आईजी रैंक के अधिकारी की सिफारीश के बाद ही केस दर्ज किया जाएगा।
3. जिला स्तर पर अगर कोई संगाठित क्राइम करता है तो उसकी रिपोर्ट कमिश्रर और डीएम देंगे।
4. यूपीकोका के सेक्शन 28 (3ए) कानून के तहत बिना जुर्म साबित हुए भी पुलिस किसी भी आरोपी को 60 दिन तक हवालात में रख सकती है।
5. यूपीकोका सेक्शन 33 (सी) के तहत जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ही यूपीकोका के अपराधी साथी कैदियों से मिल सकते है और वो भी हफ्त में दो बार।
6. यूपीकोका की सुनवाई को लिए स्पेशल कोर्ट होगा।
बता दें कि योगी सरकार शीतकालीन सत्र में इस बिल को पास कराना चाहती थी, मगर इस पर चर्चा शुरू हुई तो विपक्ष ने इस कानून का विरोध किया था। इस बिल पर समाजवादी पार्टी ने कहा था कि सरकार विरोधियों को दबाने के लिए इसका गलत इस्तेमाल कर सकती है।
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