कर्नाटक में मोदी एवं अमित शाह की तोड़ फोड़, खरीद फरोख्त, संवैधानिक और राजनैतिक मर्यादा के हनन की पराजय — प्रमोद तिवारी


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lucknow | कांगे्रस के वरिष्ठ नेता श्री प्रमोद तिवारी ने कहा है कि आज जहां पूरा देष कर्नाटक में लोकतन्त्र की विजय को इलेक्ट्राॅनिक चैनल पर देख रहा था, वहीं लोगों ने यह भी देखा कि किस तरह श्री यदियुरप्पा  ने ‘‘राष्ट्रगान’’ का अपमान किया, और चलते हुये ‘‘राष्ट्रगान’’ को छोंड़कर उसका अपमान करते हुये चले गये । यही नहीं ‘‘प्रोटेम स्पीकर’’ भी जिन्होंने स्वयं विधान सभा की आज की कार्यवाही का एजेण्डा तय किया था कि कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से होगा – किन्तु वे स्वयं भी राष्ट्रगान के चलते हुये कुर्सी छोंड़कर चले गये ।
श्री तिवारी ने कहा है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय जनतापार्टी ने कभी भी न तो ‘‘राष्ट्रगान’’ का सम्मान किया है और न ही ‘‘राष्ट्रीय ध्वज’’ का । क्योंकि इस दल ने देष की आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी ।1971 (राष्ट्रगान अपमान निवारण अधिनियम 1971) की धारा- 3 के अनुसार चलते हुये राष्ट्रगान को सम्मान न देना, राष्ट्रगान का अपमान है और इसके लिये 3 वर्ष की सजा का प्राविधान भी है । राष्ट्रगान के इस अपमान के लिये कर्नाटक सरकार को तुरन्त श्री यदियुरप्पा और प्रोटेम स्पीकर के विरुद्ध  दर्ज करके अपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए ।
श्री तिवारी ने कहा है कि कर्नाटक विधान सभा में भारतीय जनतापार्टी की पराजय और कांगे्रस गठबन्धन की हुई जीत – लोकतन्त्र की जीत है । यह जीत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं भारतीय जनतापार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह की तोड़ फोड़, खरीद फरोख्त, संवैधानिक और राजनैतिक मर्यादा के हनन की पराजय है ।
श्री तिवारी ने कहा है कि जिस प्रकार 117 विधायकों के कांगे्रस – जे.डी.एस. गठबन्धन को नजरअंदाज करके मात्र 104 सदस्यों वाली भारतीय जनतापार्टी को केन्द्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप राज्यपाल  ने कर्नाटक में शपथ दिलायी- वह भारत के संविधान और लोकतन्त्र का अपमान था । इसके लिये मात्र कर्नाटक का राजभवन ही गुनहगार नहीं था बल्कि देष के प्रधानमंत्री  भी गुनहगार है, कर्नाटक में भा. ज. पा. की पराजय होने से देष की महान जनता के आगे भारतीय जनतापार्टी की छल, छद््म, भय और आतंक का अन्त हुआ । यह तो मात्र एक ‘‘ट्रेलर’’ था- और पूरी फिल्म के रूप में आगामी 2019 में भारतीय जनतापार्टी की केन्द्र सरकार का पतन होगा, और कांगे्रस के नेतृृत्व में सभी धर्म निरपेक्ष विरोधी दलों के गठबन्धन की जीत होगी तथा केन्द्र में कांगे्रस के नेतृृत्व में देष में एक स्थिर सरकार बनेगी ।

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