उत्तर प्रदेश महापौर काउंसिल की हुई बैठक
लखनऊ । सूबे की भाजपा सरकार ने अगर साथ दिया तो बहुत जल्द यूपी के महापौर और शक्तिशाली हो जाएंगे । महापौरों के अधिकारों के लिए 74वें संविधान संशोधन को लेकर उत्तर प्रदेश महापौर काउंसिल की बैठक में कई बिंदुओं पर चर्चा हुई, प्रस्ताव पारित हुआ । उसके बाद महापौरों ने राज्यपाल, सीएम योगी व नगर विकास मंत्री से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा । हालांकि इस बैठक में अलीगढ और मेरठ के महापौर उपस्थित नहीं हो सके ।
लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया के बुलावे पर उत्तर प्रदेश महापौर काउंसिल की बैठक आज राजधानी के हबीबुल्लाह स्टेट के एक होटल में आयोजित हुई । बैठक में आए के प्रदेश के महापौरों ने अपने-अपने महानगरों में हो रही प्रशासनिक दिक्कतों का जिक्र किया । सभी ने 74वें संविधान संशोधन के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों को लेकर कहा कि उन्हें प्रत्येक स्तर पर उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है । महापौरों का कहना था कि किसी भी योजना के विषय में जिला एवं प्रदेश स्तर पर नौकरशाह कोई परामर्श नहीं लेते है । उनका कहना था कि लगातार हो रही उपेक्षा से अत्यधिक व्यथित हैं ।

महापौरों ने प्रस्ताव पारित कर कहा है कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार नगर निगमों को 74वे संविधान संसोधन के अनुरूप स्वायत्ता प्रदान करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाती है तो वें अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे । महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश महापौर परिषद के पूर्व अध्यक्ष रह चुके लखनऊ के पूर्व महापौर एवं वर्तमान उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने 74 वें संविधान संशोधन को लेकर प्रदेश व केंद्र सरकार से पिछले 10 वर्ष तक संघर्ष किया था । उन्होंने कहा कि वे आज ऐसे पद पर हैं कि इस मसले को मंत्रिमंडल के सामने रख कर उसे लागू कराने का प्रयास कर सकते हैं । उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी, प्रधानमंत्री आवास योजना में भी अधिकार दिए जाएं, जिससे हमारे शहर भी स्मार्ट सिटी की रैंकिंग टॉप 10 में आ पाएं ।
बैठक में महापौर नवीन जैन – आगरा, अभिलाषा गुप्ता – इलाहाबाद, प्रमिला पाण्डेय – कानपुर, आशा शर्मा – गाज़ियाबाद, सीताराम जायसवाल – गोरखपुर, डॉ उमेश गौतम – बरेली, विनोद अग्रवाल – मुरादाबाद, मृदुला जायसवाल – वाराणसी, संजीव वालियान – सहारनपुर, नूतन राठौर – फिरोजाबाद, डॉ मुकेश आर्य बंधु – मथुरा-वृन्दावन और अयोध्या-फैजाबाद के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय मौजूद थे ।
इन मुख्य बिंदुओं पर हुई चर्चा :-
- स्थापना निधि, स्मार्ट सिटी, प्रोजेक्ट अमृत योजना में मंडलायुक्त को अध्यक्ष बना रखा है उसमें पूर्व की भांति महापौर को अध्यक्ष बनाया जाए ।
- मेयर का प्रोटोकॉल सभी शहरों के अधिकारियों को भेजना और उस का कड़ाई से पालन करवाना ।
- नगर आयुक्त को कोई भी कार्य बिना महापौर के अनुमोदन के ना हो ।
- सभी समस्याओं का समाधान सिर्फ और सिर्फ 74वां संशोधन लागू करना है ।
- यह भाजपा के संकल्प पत्र में दिया गया है और इस समय केंद्र और राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।
- नगर निकायों से सम्बंधित आदेशों का संपूर्ण पालन न होना, आदेश पारित कर इस व्यवस्था को सही किया जाना ।
- डूडा निर्देशक नगर आयुक्त होते हैं । डूडा को नगर निगम में लाकर महापौर के अधीन लाया जाए ।
- सरकार की तरफ से मेयर ID, सचिवालय पास और गाड़ी पास जारी किया जाए ।
- विकास प्राधिकरण का चेयरमैन कमिश्नर की जगह महापौर को बनाया जाए ।
- जिस प्रकार विधायक और सांसदों के लिएमुख्यमंत्री ने सोमवार और मंगलवार का दिन निश्चित किए हैं उसी प्रकार से महापौरों के लिए एक दिन और समय निश्चित हो ।
- पार्षद भत्ता बनाया जाए और पार्षदों को भत्ता दिए जाने का अधिकार महापौर को हो ।
- निकायों में अधिकारी कम है, अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाए ।
- लखनऊ नगर निगम महापौर काउंसिल के भवन के के लिए जमीन उपलब्ध कराएगा और बाकी उत्तर प्रदेश सरकार उस पर भवन बनवाए ।
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