
lucknow | जीडीए के फ्लैट, आवासीय प्लॉट और व्यावसायिक भूखंड खरीदना अब सस्ता हो गया है। ऐसा प्राधिकरण के अपनी नई आवासीय योजनाओ में 1.50 फीसदी ब्याज दरें कम करने से हुआ है। इसके अलावा जीडीए ने व्यावसायिक योजनाओं और दंड ब्याज में भी एक-एक फीसदी की कटौती की है।जीडीए बोर्ड अध्यक्ष और मेरठ मंडल के मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्राधिकरण सभाकक्ष में बोर्ड फिर अवस्थापना निधि की बैठक हुई। इस दौरान लोगों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। दोनों बैठकों में कुल 50 प्रस्ताव रखे गए, जिसमें से 48 प्रस्तावों पर बोर्ड की मुहर लग गई।
जीडीए अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि भविष्य में प्राधिकरण की जितनी भी आवासीय और व्यावसायिक योजनाएं आएंगी, उनकी ब्याज दर कम कर दी गई है। उन्होंने बताया कि अभी तक आवासीय योजना पर 12 फीसदी ब्याज लगता है, जिसे घटाकर 10.50 फीसदी कर दिया गया है। वहीं, व्यावसायिक योजनाओं पर ब्याज दर 12 फीसदी से घटाकर 11 फीसदी कर दी गई है। इसी तरह दंड ब्याज अभी तक 15 फीसदी लिया जाता है, जिसे कम करके 14 फीसदी कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों बैंकों ने ब्जाय दरों में कटौती की है। इसी को लेकर एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ब्याज दर कम की गई है। यह आने वाली नई योजनाओं पर तत्काल प्रभाव से लागू होगी। इस दौरान जीडीए उपाध्यक्ष रितु माहेश्वरी, सचिव संतोष कुमार राय, मुख्य अभियंता विवेकानंद सिंह, एसएस वर्मा आदि मौजूद रहे।
जीडीए अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में प्राधिकरण मधुबन बापूधाम, कोयल एन्क्लेव, मोदीनगर, मुरादनगर, लोनी, इंदिरापुरम एक्सटेंशन, इंदिरापुरम आदि योजनाओं में आवासीय और व्यावसायिक योजनाएं लाएगा।
जीडीए उपाध्यक्ष रितु माहेश्वरी ने बताया कि प्राधिकरण ने 31 मार्च 2019 तक प्राधिकरण की सभी योजनाओं के सेक्टर रेट फ्रीज कर दिए हैं। हालांकि यह नियम कौशांबी, इंदिरापुरम और वैशाली योजना पर लागू नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले 31 मार्च 2018 तक प्राधिकरण ने सभी योजनाओं के सेक्टर रेट फ्रीज किए थे।
पुराने मकान तोड़कर नए बना सकेंगे
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जीडीए के दशकों पुराने भवनों में रहने की मजबूरी अब खत्म हो गई है। जीडीए बोर्ड बैठक में ऐसे भवनों को तोड़कर नया बनाने की अनुमति दी गई है। अब भवन स्वामी अपने पड़ोसी से एनओसी लेकर प्राधिकरण से नक्शा पास कराकर अपने हिसाब से भवन का निर्माण कर सकता है। इसके लिए नक्शा पास कराना होगा।
जीडीए अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि भवन स्वामी पुराने भवन तोड़कर नए तरीके से बना सकते हैं, लेकिन इसके लिए उसे अपने पड़ोसी से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद जीडीए में नए सिरे से नक्शा पास करवाकर भवन को बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में प्राधिकरण ने एचआईजी, एलआईजी, एमआईजी और ईडब्ल्यूएस भवन व फ्लैट बनाए हैं। इन्हें बने हुए 30 से 40 साल हो चुके हैं। अब इनमें से ज्यादातर की हालत जर्जर है। इसी को देखते हुए प्राधिकरण ने यह नया नियम लागू किया है।
संजयनगर, राजनगर, नेहरूनगर, कोयल एन्क्लेव, कौशांबी, इंदिरापुरम, गोविंदपुरम, शास्त्रीनगर, पटेलनगर समेत शहर के अन्य हिस्सों में रहने वाले उन लोगों को फायदा होगा, जिनके आवास जर्जर हो गए हैं।
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