ऊर्जा विभाग : 50 लाख स्मार्ट मीटर के प्रोजेक्ट पर संकट बरकरार, कहीं व्यवस्था हो न जाये ध्वस्त !


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लखनऊ। विगत वर्ष सभी बिजली कम्पनियों के लिये खरीदे गये लगभग 50 हजार प्रीपेड मीटर जिसमें से सभी कम्पनियों में लगभग 19 हजार 180 मीटर लगाये गये। मीटर लगाने रिचार्ज अपडेशन सहित लोड बढ़ाने घटाने व अन्य सिस्टम सपोर्ट करने के लिये सिक्योर मीटर कम्पनी को वर्ष 2014 में 3 साल का जिम्मा दिया गया था। अन्ततः उसकी अवधि में थोड़ा इजाफा किया गया था, जो मार्च 2018 में समाप्त हो गया। उसके बाद बिजली कम्पनियों का सपोर्ट सिस्टम ऐसा रहा कि जो उपभोक्ता प्रीपेड मीटर लगा लिये वह रिचार्ज सहित अन्य सिस्टम सपोर्ट के लिये बड़े पैमाने पर परेशान हो रहे हैं। उनके कष्ट को कोई देखने वाला नहीं है। आज उपभोक्ता परिषद ने इसकी तहकीकात के लिये आधा दर्जन से ज्यादा विद्युत उपभोक्ताओं जिनके यहां प्रीपेड मीटर लगाया गया है, उनसे सम्पर्क किया तो वह बेहद परेशान व नाराज है।

उनके द्वारा विभाग के प्रति बड़ी नाराजगी व्यक्त की गयी। प्रीपेड में नया कनेक्शन लेने के लिये उपभोक्त चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि 50 हजार प्रीपेड मीटर का यह हाल है तो आने वाले समय में जो पावर कार्पोरेशन ग्रामीण सहित सरकारी उपभोक्ताओं के यहां 1 करोड़ प्रीपेड मीटर व शहरी क्षेत्र में 50 लाख स्मार्ट मीटर लगाने की बात कर रहा है उसका क्या हाल होगा? यह सोचना भी भयावह है।

उ.प्र.राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस प्रीपेड मीटर के प्रोजेक्ट के लिये उ0प्र0 विद्युत नियामक आयोग द्वारा अनेकों बार बिजली अभियन्ताओं व एचसीएल सहित कम्पनियों के अधिकारियों को तलब कर एक नियत समय सीमा में प्रीपेड व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाये जाने का निर्देश भी दिया था। लेकिन आज ज्यादातर उपभोक्ता बेहद नाराज व परेशान है, उनके द्वारा विभाग के प्रति गुस्सा व्यक्त करते हुए उपभोक्ता परिषद से अपना दर्द बांटते हुए राहत दिलाने की मांग की गयी।

पभोक्ता रिचार्ज कराने के लिये परेशान हो रहे हैं। लोड बढ़ाने के बाद सिस्टम को अपगे्रड कराने के लिये परेशान हो रहे हैं। अनेकों कठिनाईयां उनके सामने आ रही है लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी मस्त हैं। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जल्द ही इस पूरे मामले को नियामक आयोग की होने वाली बैठक में उठाया जायेगा और इस पूरे मामले को ऊर्जा मंत्री के सामने भी रखते हुए उपभोक्ताओं को राहत दिलाने की मांग की जायेगी। अभी भी समय है कि बिजली कम्पनियों का प्रीपेड मीटर का यह हश्र देखकर आगे के प्रोजेक्ट पर विचार करना चाहिए।


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