
राजकीय निर्माण निगम और सेतु निगम का एमडी बनने की चाह में
लखनऊ । लोक निर्माण विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है मुख्य अभियन्ता बने पी के कटियार को तमाम वरिष्ठ व लेबिल वन के मुख्य अभियन्ताओ को किनारे करते हुए मुख्यालय पर ही मुख्य अभियन्ता लेबिल वन बनाया गया है । जिससे पूरे विभाग में अजीबोगरीब स्थिति बन गई है । इतना ही नहीं कटियार की नजर राजकीय निर्माण निगम और सेतु निगम के एमडी की कुर्सी पर भी है जिसके लिए वह प्रयासरत बताये जा रहे हैं । एक कटियार, पूरे विभाग को मनमाने तरीके से नचा रहे हैं वहीं डिप्टी सीएम व मंत्री केशव मौर्य भी कुछ नहीं कर रहे हैं । जिससे पूरे विभाग के अभियंताओं में जबरदस्त रोष है ।
लोक निर्माण विभाग में अभी पदोन्नति पा कर अधीक्षण अभियंताओ के साथ पी के कटियार भी मुख्य अभियन्ता बने । सारे मुख्य अभियन्ताओ की तैनाती लखनऊ से बाहर जिलों में कर दी गई पर कटियार नहीं गये । वह प्रमुख अभियंता के स्टाफ अफसर बने रहे । बताया जा रहा है कि एक आदेश करा कर वह स्वयं मुख्यालय पर मुख्य अभियन्ता वन, बन गये हैं।
लोकनिर्माण विभाग में मुख्यालय पर मुख्य अभियन्ता लेबिल वन , का पद , सबसे वरिष्ठ होता है यहां पर उसी मुख्य अभियन्ता को बैठाया जाता है जो कि वरिष्ठता में प्रमुख अभियंता से दूसरे नंबर पर हो और लेबिल वन का मुख्य अभियन्ता हो । मुख्य अभियन्ता मुख्यालय वन, यूपी के 18, मंडलो में तैनात मुख्य अभियन्ताओ के कार्यों की रोज मोनिटरिंग करता है तथा निर्माण कार्यों पर भी नजर रखने का काम मुख्यरुप से करता है ।
पी के कटियार, अभी अभी मुख्य अभियन्ता बने हैं और लेबिल दो के , उनसे ऊपर लेबिल वन , कई मुख्य अभियन्ता है जिनको नजर अंदाज कर कटियार मुख्य अभियन्ता मुख्यालय लेबिल वन बन बैठे हैं । जबकि विभाग में लेबिल वन के मुख्य अभियन्ता विश्वदीप खाली बैठे हैं और अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं ।
सबसे कनिष्ठ कटियार के मुख्य अभियन्ता मुख्यालय वन, बनने से पूरे विभाग में बडी ही असहज स्थिति हो गई है , लेबिल वन के मुख्य अभियन्ता अब अपने से बहुत कनिष्ठ कटियार को कैसे रिपोर्ट करेंगे । लेबिल वन के मुख्य अभियन्ताओ का कहना है कि लोक निर्माण विभाग में ऐसा पहली बार हुआ है जब नियमों के विपरीत जा कर सबसे कनिष्ठ को लेबिल वन के पद पर बैठा दिया गया हो ।
सूत्रों का कहना है कि मुख्य अभियन्ता पी के कटियार , लखनऊ से बाहर नहीं जाना चाहते हैं । वह पहले निर्माण निगम के या सेतु निगम के एमडी बनने के लिए प्रयास कर रहे थे लेकिन जब बात नहीं बनी तो अपना आदेश इस पद पर करा लिया है ।
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