
योगी सरकार के सख्त आदेश और त्वरित कार्यवाही का सच !!
लखनऊ| उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा मंत्री डां.दिनेश शर्मा के द्वारा बार बार सख्त आदेश व त्वरित कार्यवाही की दुहाई देने का प्रभाव विश्वविद्यालय कुलसचिवो व अनुदानित महाविद्यालयो के प्राचार्य/प्रबन्धको पर लेश मात्र का भी नहीं पड़ रहा है । यह सरकार के चिन्ता का विषय होना चाहिए कि प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में में 272 महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों व इनमें कार्यरत अनुमोदित शिक्षको की सूचना शासन व निदेशक उच्च शिक्षा इलाहाबाद के दर्जनो तथाकथित सख्त आदेशो के बावजूद एक वर्ष बाद भी नहीं प्राप्त हो सकी है।
आखिर इसे उच्च शिक्षा मंत्री का उच्च शिक्षा विभाग व विश्वविद्यालय कुलसचिवो के ऊपर इस्तकबाल की कमीं माना जाय या फिर महाविद्यालय प्रबन्धक के धनबल व रसूख का प्रभाव कि दिनांक 23.06.2017 से निरन्तर कोई ऐसा महीना नहीं हैकि प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयो के स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षको की सूचना न मांगी गयी हो, लेकिन अनुमोदित शिक्षको का दुर्भाग्य यह रहा कि ऐसे नियम कानून और सख्त आदेश व शीर्ष प्राथमिकता का सन्दर्भ उल्लिखित करने वाली योगी सरकार में भी पूर्ववर्ती बसपा एवं सपा सरकारो की तरह विनियमितिकरण के नाम पर मात्र आश्वासन और पत्राचार का ही खेल किया जा रहा है।
यह कितना विसंगतिपूर्ण एवं दुखद हैकि प्रदेश के मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री का आदेश का अनुपालन स्वयं उन्ही के मातहत अधिकारियों द्वारा नहीं किया जा रहा है।
मामला:- अनुदानित महाविद्यालय विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक संघ की मुख्य मांग प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित योजना के अन्तर्गत विगत 18 वर्षो से एक प्रकृति के महाविद्यालय(अनुदानित अशासकीय) विषय विभाग में दोहरी व्यवस्था में आर्थिक विपन्नता में ख़ुदकुशी के शिकार हो रहे स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षको के विनियमितिकरण/यू.जी.सी.वेतनमान प्रदान करने से जुड़ा है।
जिसके सन्दर्भ में सरकार व शासन के निर्देश पर दिनांक 23.06.2017 को निदेशक उच्च शिक्षा इलाहाबाद द्वा समस्त क्षेत्रीय अधिकारियो, विश्वविद्यालय कुलसचिवों एवं अनुदानित महाविद्यालयों के अनुमोदित शिक्षको की विवरणात्मक सूचना 03 दिन में मांगी गयी। लेकिन सूचना नहीं मिली। पुन : 27.06.2018 को पत्र जारी हुआ,परन्तु सूचना नही मिली। बार बार के दर्जनो आदेशो के बावजूद 01 फरवरी 2018 को अपूर्ण सूचनाओ के साथ ही उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डां.के.यस.पाठक की उपस्थिति में लालीपाप रुपी खाना पूर्ति में बैठक भी कर ली गयी। इसके पश्चात् पुन: दर्जनो तथाकथित सख्त आदेश उक्त सूचना की प्राप्ति हेतु निदेशक उच्च शिक्षा इलाहाबाद द्वारा प्रतिमाह जारी किये गये,लेकिन हर बार अधिकांश अनुदानित महाविद्यालय प्राचार्य/प्रबन्धको, कुलसचिवो व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों द्वारा उक्त आदेशो व मुख्यमंत्री के सन्दर्भ की अवहेलना करके या तो सूचना ही नहीं भेजी गयी या फिर अपूर्ण त्रुटिपूर्ण एवं भ्रामक सूचना ही भेजी गयी।
जिस पर निदेशक उच्च शिक्षा इलाहाबाद द्वारा पुन : दिनांक 11.07.2018 उक्त सूचना प्राप्ति हेतु प्रेम पत्र जारी कर एक सप्ताह में समस्त क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियो, कुलसचिवो व अनुदानित महाविद्यालय प्राचार्य/प्रबन्धको से मांगा गया है !!
यह कितना हास्यास्पद हैकि बार बार मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के आदेशो की एक वर्ष से अवहेलना कर अनुदानित महाविद्यालयो के स्ववित्तपोषित शिक्षको की यथेष्ट सूचना न देने वाले अधिकारियो, कुलसचिवो व प्राचार्य/प्रबन्धको के विरुद्ध को दण्डात्मक व वैधानिक कार्यवाही करने के बजाय अनुमोदित शिक्षको को विनियमितिकरण/यू.जी.सी.वेतनमान के नाम पर गुमराह करने के लिए ही एक बार फिर एक आदेश सूचना प्राप्ति हेतु शासन के निर्देश पर निदेशालय द्वारा जारी दिनांक 11.07.2018 को किया गया है !!!
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