ग्रेटर नोएडा बिल्डिंग्स हादसा, सवालों के घेरे में पूरा प्रशासन


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ग्रेटर नोएडा |   ग्रेटर नोएडा वेस्ट के शाहबेरी में कल तक जहां उम्मीदों का आशियाना खड़ा था, वहां अब मौत का सन्नाटा पसरा है। दोनों बिल्डिंगें जमींदोज हैं और इसमें सपने के साथ लोगों के अपने भी गुम हैं। मंगलवार रात भरभराकर गिरीं दो इमारतों ने 4 जिंदगियां लील लीं, जबकि 14-15 लोग इसमें दबे बताए जा रहे हैं। पीड़ितों के परिजन बदहवास हैं। जाएं तो कहां जाएं। करें तो क्या करें।
इस हादसे के बाद अवैध निर्माण के गोरखधंधे में पूरा सरकारी अमला सवालों के घेरे में है। अथॉरिटी, बैंक, पुलिस से लेकर यूपी पावर कॉर्पोरेशन तक सब पर सवाल उठ रहे हैं। हैरत की बात है कि बिल्डरों के अवैध निर्माण की सूचना दिए जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

मलबे के ढेर में बदला आशियाने का सपना

सी महीने की 2 तारीख को यूपी पुलिस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ट्वीट कर बिसरख थाना क्षेत्र स्थित शाहबेरी में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण की सूचना देकर कार्रवाई की मांग की गई थी। @smajsevak हैंडल से किए एक ट्वीट में आरोप लगाया गया था कि भूमाफिया थाना प्रभारी को मोटी रकम देकर अवैध तरीके से काम कर रहे हैं। डीजीपी यूपी और मेरठ जोन के एडीजी से अनुरोध किया गया था कि गरीब जनता को भूमाफियाओं से बचा लीजिए।

इस ट्वीट पर यूपी पुलिस ने नोएडा पुलिस से प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। नोएडा पुलिस ने इसका जवाब भी दिया पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि रजिस्ट्री ऑफिस से भी ऐसी सेटिंग थी कि बिना नक्शा पास कराए 20,000 रुपये रिश्वत देकर रजिस्ट्री करा दी जाती थी। बिल्डरों ने फ्लैट बेचने से पहले लोगों को सड़क, नाली, सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं का वादा किया था, जिसे भी पूरा नहीं किया गया।


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