
समय पर पुलिस फोर्स का नहीं मिलना भी इस हादसे का मुख्य कारण माना गया
lucknow | गाज़ियाबाद केआकाश नगर में अवैध निर्माणाधीन इमारत गिरने पर जीडीए के सहायक अभियंता सहित नौ अधिकारियों पर मंगलवार को मसूरी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। जीडीए की जांच में भी यह सभी दोषी पाए गए हैं। दो दिन पहले ही मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने इस संबंध में जीडीए वीसी को मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।
शासन के आला अधिकारियों की नाराजगी के बाद जीडीए उपाध्यक्ष ने मजिस्ट्रेट जांच के आधार पर सोमवार को चार सुपरवाइजरों को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही जीडीए के सात अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। मंडलायुक्त ने घटनास्थल का दौरा करने के दौरान डीएम को सभी दोषी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिए थे। इसके बाद जीडीए ओएसडी वीके सिंह ने मजिस्ट्रेट और जीडीए की जांच के आधार पर प्रवर्तन तीन के दोषी अधिकारियों के खिलाफ मसूरी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया है। मसूरी थाने के सीओ प्रभात कुमार का कहना है कि जीडीए के बॉयलाज के अनुसार इन सभी अधिकारियों पर लापरवाही करने के आरोप में धारा 166ए के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा ,सहायक अभियंता निशांत कुमार, अवर अभियंता टीएन सिंह, रमाकांत तिवारी, रामेश्वर शर्मा, अरुण कुमार सिंह, सुपरवाइजर गोविंदशरण दुबे, गजेंद्र सिंह, वर्क मेट मुकेश कुमार और राजबीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
मजिस्ट्रेट जांच के बाद जीडीए जांच में भी प्रवर्तन जोन तीन के अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है। यह जांच जीडीए सचिव संतोष कुमार राय, मुख्य अभियंता विवेकानंद सिंह, सीएटीपी इश्तियाक अहमद ने की। इस जांच रिपोर्ट में जोन तीन के सभी प्रवर्तन अधिकारियों को दोषी पाया गया। इसके साथ ही समय पर पुलिस फोर्स का नहीं मिलना भी इस हादसे का मुख्य कारण माना गया। सचिव ने यह रिपोर्ट प्राधिकरण की वीसी को सौंप दी है।
काम में लापरवाही का दोषी माना
आकाश नगर में यह इमारत 2017 में बननी शुरू हुई थी। इसके बाद जीडीए के जोन तीन प्रवर्तन अनुभाग की तरफ से 14 नवंबर 2017 को अवैध निर्माण करने का नोटिस जारी किया गया। उस वक्त इमारत में पहला लेंटर डला था। इसके बाद इमारत पांच मंजिल तक बन गई, लेकिन प्रवर्तन अनुभाग यह अवैध निर्माण नहीं रुकवा सका।
https://rashtriyadinmaan.com
