
मानक,प्राचार्य एवं शिक्षक विहीन महाविद्यालयों में सरपट दौड़ रही है अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा
lucknow | यह कहानी है डां.राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद की। जहाँ के कुलपति प्रोफ़ेसर मनोज दीक्षित के द्वारा प्रारम्भ में तो फर्जी शिक्षको,शिक्षक विहीन महाविद्यालय प्राचार्य विहीन एवं मानक विहीन महाविद्यालयों के प्रति बड़े ही सख्त दिखाई दिये और महाविद्यालय प्रबन्धन पर दबाव भी डाला गया लेकिन कारवाई आज तक ना कर सके और धीरे धीरे वह शांत होते गये| जिस कारण कुलपति अवध विश्वविद्यालय के लिए अब राज्यपाल ,उच्च शिक्षा मंत्री ,सचिव उच्च शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा के द्वारा भी जारी किये आदेश का कोई मायने अब नहीं रह गया है।
आख़िर जिस कुलपति द्वारा अधिकारिक रुप से स्वयं यह बयान दिया गया थाकि अवध विश्वविद्यालय में बीस हजार फर्जी शिक्षक बाहर होगे,इसका मतलब था कि अवध विश्वविद्यालय में बीस हजार फर्जी शिक्षक है ! दूसरी तरफ यह भी कहा गया कि 430 कालेजो में प्राचार्य नहीं है और 131 कालेजो में एक भी शिक्षक नहीं है और तो और कितने ऐसे भी महाविद्यालय है जो मात्र महाविद्यालय के नाम पर शोषण एवं भ्रष्टाचार की मात्र दुकान बन चुके है जिनमें अवस्थापना सुविधा दूर दूर तक दिखाई नहीं पड़ती,बावजूद इसके कुलपति कुछ चापलूसो के बहकावे में आकर इस प्रकार के भ्रष्टाचार व अनियमितता पर अपनी आंख व कान ही बन्द कर लिए है,और आये दिन विश्वविद्यालय परिसर में रंगारंग कार्यक्रमों, अयोध्या में सरयू आरती तक सीमित हो चुके है।
यह कितना हास्यास्पद हैकि कुलपति की नाक के नीचे ही पूरा का पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबन्धन की खैरात को अपने जीवन कर्म और दायित्व का आधार मान बैठा है जिसके कारण कुलपति व कुलसचिव द्वारा जुलाई-2018 में ही महाविद्यालयों के भौतिक सत्यापन के लिए एक टीम का भी गठन किया गया था,लेकिन वह टीम भी गुलाबी लिफाफे के नीचे ही दम तोड़ गई,और आज तीन महीने बाद भी विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के एक भी महाविद्यालय के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया सम्पन्न नहीं हो सकी।
यहाँ तक कि अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक संघ ईकाई सुल्तानपुर के जिलाध्यक्ष डां.जितेन्द्र कुमार त्रिपाठी द्वारा कुलपति से लिखित मांग भी की गयी थीकि यदि एक साथ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सभी महाविद्यालयों का भौतिक सत्यापन करा पाना सम्भव न हो तो कम से कम प्रथम चरण में विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम संचालित मात्र 18 अनुदानित अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों का ही भौतिक सत्यापन करवाया जाय,लेकिन दुर्भाग्य यह कि कुलपति महोदय इन 18 कालेजो का भी अभी तक भौतिक सत्यापन नहीं करवा सके। नि:सन्देह भौतिक सत्यापन के नाम पर मात्र प्रेमपत्र जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबन्धनों से सिर्फ और सिर्फ लिफाफा मोटा करने का ही आधार बना लिया गया है। जिसके कारण पूरा विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार में आकंठ डूब चुका है।
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