
lucknow | उ0प्र0 के राज्य विश्वविद्यालयों के पास अपने स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों /प्राचार्यो का कोई डाटा नही है ।विश्वविद्यालय इस मुद्दे पर पहल नही कर रहे हैं ।उ0प्र0 के मात्र दो विश्वविद्यालयों ने विवरण ऑनलाइन किया तो अनुमोदन घोटाला और शिक्षक फर्जीवाड़ा सभी के सामने दिखाई पड़ा ।सरकार के पास भी कोई आँकड़ा नहीं है कि उ0प्र0 में स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कितने प्राचार्य और कितने शिक्षक है ।उ0प्र0 के राज्य विश्वविद्यालयों के द्वारा अभी तक अपने अपने विश्वविद्यालय से सम्बद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों और प्राचार्य के सम्बन्ध में जानकारी नही है ।
उ0प्र0 की उच्च शिक्षा व्यवस्था का 90% भाग ऐसे हालत में है जिसके शिक्षकों और प्राचार्यो का कोई आँकड़ा न तो सरकार के पास न विश्वविद्यालय के पास इन महाविद्यालयों में किसकी परीक्षा होगी जब कक्षाए चली ही नही कौन परीक्षा कराएगा जब शिक्षक और प्राचार्य केवल विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के अभिलेखो में ही है ।फिर वही नाटकीय खेल होगा अनुमोदित प्राचार्य को केन्द्राअध्यक्ष बनाया जायगा वह तुरंत बीमार पड़ जायगा और परीक्षा भर बीमार रहेगा उसकी जगह पर नकली केन्द्रा अध्यक्ष परीक्षा कराएगा अनुमोदित शिक्षक परीक्षा ड्यूटी में नही होंगे नकली असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा ड्यूटी करेंगे यह खेल बहुत पुराना है ।फिर से यही खेल खेलने की तैयारी में हैं उ0प्र0 का उच्च शिक्षा विभाग और उ0प्र0 के राज्य विश्वविद्यालय क्या उ0प्र0 के राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा इस प्रथा पर रोक लगाने का कार्य किया जाना सम्भव है ।
नकली शिक्षक और नकली प्राचार्य के सहारे है राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षा ।वह प्राचार्य कौन है जो अनुमोदन कराकर घर पर बैठे हैं ।कुछ सेवा निवृत्त शिक्षक भी इस प्राचार्य अनुमोदन घोटाले में सामिल है जो अनुमोदन के बाद छुट्टी पर है और परीक्षा के समय भी छुट्टी पर है ।ऐसे शिक्षक जो कभी भी महाविद्यालयों की तरफ रुख नही करते इनका उच्च शिक्षा से दूर तक कोई वास्ता नही वह अनुमोदन कराकर घर में बैठे हैं ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही कब होगी विश्वविद्यालय अपने स्तर से उन महाविद्यालयों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करे जो अनुमोदन घोटाले के सहारे महाविद्यालय संचालित कर रहे हैं ।उ0प्र0 की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विश्वविद्यालय और शासन प्रशासन सभी को पहल करने की आवश्यकता है ।
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