
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 में आउटसोर्सिंग से स्वायल हेल्थ कार्ड बनाने में हुई अनिनयिमतता की जांच कृषि उत्पादन आयुक्त से कराई गई थी। जांच में टेंडर के स्तर पर भी अनियमितता की भी पुष्टि हुई है। अब केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार नए सिरे से टेंडर कराए जाएंगे। शिकायतें मिलने के बाद उन जिलों में भुगतान रोक दिया गया था, जहां अभी तक भुगतान नहीं हुए थे। बरेली, अलीगढ़ व मुरादाबाद में टेंडर फाइनल हो गए थे। बरेली में किए गए भुगतान की रिकवरी भी कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस मामले में कृषि निदेशालय में संयुक्त कृषि निदेशक (जांच एवं मृदा परीक्षण) पंकज त्रिपाठी, बरेली के उप कृषि निदेशक विनोद कुमार, मुरादाबाद के उप कृषि निदेशक डॉ. अशोक कुमार, अलीगढ़ मंडल की निविदा समिति के अध्यक्ष एवं संयुक्त कृषि निदेशक जुगेन्द्र सिंह राठौर, सहारनपुर के उप कृषि निदेशक राजीव कुमार, झांसी के उप कृषि निदेशक राम प्रताप, मेरठ के उप कृषि निदेशक सुरेश चंद्र चौधरी, अलीगढ़ के उप कृषि निदेशक एवं प्रभारी सहायक निदेशक मृदा परीक्षण श्रीदेव शर्मा तथा बरेली के सहायक निदेशक मृदा परीक्षण संजीव कुमार को निलंबित कर दिया गया है।
कृषि मंत्री ने बताया कि टेंडर पाने वाली चार फर्मों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। कूट रचित अभिलेख प्रस्तुत करने के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
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