
नई दिल्ली. भारत के नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्तावित चर्चा और मतदान की पृष्ठभूमि में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू (M Venkaiah Naidu) ने सोमवार को कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है. एक पुस्तक विमोचन समारोह में नायडू ने कहा कि वह ऐसे मामलों में विदेशी निकायों के हस्तक्षेप की प्रवृत्ति से चिंतित हैं जो पूरी तरह भारतीय संसद और सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास पूरी तरह अवांछनीय हैं और उम्मीद है कि भविष्य में इस तरह के बयानों से बचा जाएगा.
‘हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है. यूरोपीय संसद भारत के नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चर्चा और मतदान करने वाली है जहां अधिकतर सदस्य इसके खिलाफ हैं. यूरोपीय संघ में अलग-अलग समूहों ने इस तरह के कुल छह प्रस्ताव रखे गये हैं.
यूरोपीय संसद (European Parliament) में इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट (European United Left) नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (Nordic Green Left) (जीयूई/एनजीएल) समूह ने प्रस्ताव पेश किया था जिस पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान होगा. इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के घोषणापत्र, मानवाधिकार (Human Rights) की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) के अनुच्छेद 15 (Article 15) के अलावा 2015 में हस्ताक्षरित किए गए भारत-यूरोपीय संघ सामरिक भागीदारी संयुक्त कार्य योजना और मानव अधिकारों पर यूरोपीय संघ-भारत विषयक संवाद का जिक्र किया गया है.
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