
बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स दिन में एक समय 1,275 अंक टूट गया था। अंत में यह पिछले बंद के मुकाबले 987.96 अंक या 2.42 प्रतिशत के नुकसान से 39,735.53 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 40,905.78 से 39,631.24 अंक के दायरे में घटता बढ़ता रहा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 300.25 अंक या 2.51 प्रतिशत टूटकर 11,661.85 अंक पर आ गया। 2019 में बजट के दिन निफ्टी 11,811.15 अंक पर बंद हुआ था।
दिग्गज कंपिनयों के शेयरों का हाल
सेंसेक्स की कंपनियों में आईटीसी में सबसे अधिक 6.97 प्रतिशत की गिरावट आई। एलएंडटी, एचडीएफसी, एसबीआई, ओएनजीसी, आईसीआईसीआई बैंक और इंडसइंड बैंक के शेयर भी नीचे आए। वहीं दूरी ओर टीसीएस का शेयर 4.13 प्रतिशत चढ़ गया। हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले इंडिया, टेक महिंद्रा और इन्फोसिस के शेयर भी लाभ में रहे।
निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के बीच शनिवार को दोपहर के कारोबार में बीएसई का सेंसेक्स 530 अंक टूटकर 40,194.04 अंक पर आ गया। इसी तरह निफ्टी भी 207.20 अंक के नुकसान से 11,754.90 अंक पर चल रहा था।
शेयर बाजार में हाहाकार की ये है बड़ी वजह
विशेषज्ञों ने कहा कि निवेशकों को उम्मीद थी कि सरकार सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कदम उठाएगी। बजट को लेकर उनकी उम्मीदें काफी ऊंची थीं। बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। वित्त मंत्री सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए कंपनियों से लाभांश वितरण कर (डीडीटी) हटाने का प्रस्ताव किया है। अब इसका बोझ लाभांश पाने वालों पर पड़ेगा। बजट में चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को भी बढ़ाकर 3.8 प्रतिशत किया गया है। पहले इसके 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार कारवा ने कहा कि दीर्घावधि के पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर पर कोई राहत नहीं मिलने और क्षेत्र के लिए किसी बड़े प्रोत्साहन के अभाव में निवेशक निराश हैं।
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