
lucknow |आल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन ने आज यहाँ जारी बयान में बताया कि यदि बजट में वित्त मन्त्री द्वारा की गई घोषणा को लागू किया गया तो उत्तर प्रदेश के लगभग 2000 मेगावॉट क्षमता के बिजलीघर बन्द हो जाएंगे | यदि यह हुआ तो उत्तर प्रदेश बहुत गंभीर बिजली संकट में फंस जायेगा | फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करने की मांग की है जिससे प्रदेश को अभूतपूर्व बिजली संकट से बचाया जा सके |
आल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि वित्त मंत्री ने बजट में घोषणा की है कि जो ताप बिजलीघर पर्यावरण मानकों से अधिक फ्लू गैस का उत्सर्जन कर रहे हैं उन्हें बंद कर दिया जाए और इन ताप बिजली घरों की जमीन अन्य उपयोग के लिए इस्तेमाल की जा सकती है | उन्होंने बताया कि यदि इस घोषणा पर अमल हुआ तो उत्तर प्रदेश के अनपारा ए बिजली घर की 210-210-210 मेगावाट की तीनों इकाइयां और अनपारा बी की 500-500 मेगावाट की दोनों इकाइयां बंद हो जाएंगी जो प्रदेश में सबसे सस्ती बिजली दे रही हैं | इसके अतिरिक्त ओबरा की 200-200 मेगावाट की पांच इकाइयां, पारीछा की 110 -110 मेगावाट की दो इकाइयां और हरदुआगंज की 110 मेगावाट की एक इकाई पूरी तरह बंद करनी होगी |
उन्होंने बताया कि पिछले बजट में कहा गया था कि इन बिजली घरों में प्रदूषण रोकने हेतु फ्यूल गैस डिसलफराइजड सिस्टम (एफ जी डी एस ) और सेलेक्टिव कैटिलिटिक रिडूसर (एस सी आर ) लगाए जाएँ जिसकी योजना भी बन रही थी किन्तु अब इन्हे बंद करने को कहा गया है जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है |
उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति की है कि इन बिजली घरों की जमीन के अन्य इस्तेमाल की बात कही गई है जो नियम विरुद्ध है क्योंकि जब जमीन का अधिग्रहण किया गया था तब यह अधिग्रहण बिजली उत्पादन के लिए किया गया था अब इसे बदलना नियम विरुद्ध है |
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