
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘भारत की प्राथमिकता के केंद्र में मेडिकल इक्विपमेंट बनाने, फूड प्रॉसेसिंग, टेक्सटाइल्स, लेदर तथा ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां हैं। लगभग 550 उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को भारत में शिफ्ट करने को लेकर बातचीत चल रही है।’
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कोरोना वायरस के लिए चीन को जिम्मेदारी ठहराए जाने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में भारी कड़वाहट आने की आशंका है। इस वजह से अपने सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई करने के लिए कंपनियां और सरकारें चीन से अपनी कंपनियों को दूसरे देशों में शिफ्ट कर सकती हैं।
जापान ने घोषणा कि है कि वो चीन से अपनी फैक्ट्रियों को हटाने के लिए 2.2 अरब डॉलर की मदद देगा। यूरोपीय संघ के देशों ने भी चीन के सप्लायर्स पर अपनी निर्भरता कम करने की योजना बनाई है।
एक अधिकारी ने बताया कि भारत को उम्मीद है कि वह चीन से हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स और डिवाइसेज बनाने वाली अमेरिकी कंपनियों को भारत लाने में सफल होगा। इस सिलसिले में मेडट्रॉनिक पीएलसी और अबॉट लेबोरेट्रीज को चीन से भारत लाने के लिए बातचीत जारी है। खास बात ये है कि मेडट्रॉनिक और अबॉट लेबोरेट्रीज पहले से ही भारत में मौजूद हैं और उन्हें चीन से अपना प्लांट भारत शिफ्ट करने में ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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