लखनऊ। केंद्र की सत्ता में ‘बैलेंस ऑफ पावर’ बनने को बसपा एक बार फिर रिकार्ड 500 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर किस्मत आजमाएगी। पार्टी देश के दो दर्जन राज्यों की करीब सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की कवायद कर रही है। पार्टी का मानना है कि भले ही सब सीटों पर जीत असंभव हो लेकिन जनाधार में तो कुछ न कुछ इजाफा हो ही सकता है।
सात वर्ष पहले सोशल इंजीनियरिंग के दम पर उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने के बाद भले ही बसपा का जनाधार पिछले कुछ वर्ष में गिरा है लेकिन पार्टी के हौसले में कोई कमी नहीं दिख रही है।
पार्टी 16वीं लोकसभा के चुनाव में कुल 543 संसदीय सीटों में से 500 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटी है। पार्टी कितनी सीटों पर नीला परचम फहराती है यह तो चुनाव बाद ही पता चलेगा, लेकिन किसी राष्ट्रीय पार्टी के सर्वाधिक प्रत्याशी उतारने का रिकॉर्ड पार्टी के ही नाम रहने की उम्मीद है। कारण है कि पार्टी सुप्रीमो मायावती स्पष्ट कह चुकी हैं कि बसपा किसी भी राज्य में किसी भी पार्टी से सीटों के संबंध में किसी तरह का कोई गठबंधन नहीं करेगी।
15वीं लोकसभा (वर्ष 2009) के चुनाव में बसपा ने सर्वाधिक 500 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। इनमें से 21 सांसद बने। इसके अलावा सहयोगियों के लिए कुछ सीटों को छोड़ने से कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के भी 440 प्रत्याशी ही मैदान में थे। भाजपा भी गठबंधन के चलते 433 सीटों पर ही चुनाव लड़ी थी।
दो दर्जन राज्यों में उतारे थे प्रत्याशी
5वीं लोकसभा के चुनाव में बसपा ने उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने के साथ ही आंध्र प्रदेश की 40, बिहार की 39, गुजरात की 24, हरियाणा की 10, हिमाचल प्रदेश की 4, जम्मू-कश्मीर की 5, कर्नाटक की 28, केरल की 20, मध्यप्रदेश की 28, महाराष्ट्र की 47, उड़ीसा की 19, पंजाब की 13, राजस्थान की 24, तमिलनाडु की 37, पश्चिम बंगाल की 41, छत्तीसगढ़ की 12, झारखंड की 14, उत्तराखंड की 5, अंडमान-निकोबार, चंडीगढ़, दादर नगर हवेली व पुडुचेरी की 1-1 व दिल्ली की सभी 7 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। 2004 में हुए 14वीं लोकसभा के चुनाव में भी पार्टी ने गठबंधन न करके 25 राज्यों में 435 उम्मीदवार खड़े किए थे, जिसमें से सिर्फ यूपी से ही 19 जीते थे।
तीन दशक पहले बनी थी बसपा
अब राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी बसपा का गठन 14 अप्रैल 1984 को हुआ था। 1998 के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो पार्टी के सांसद बढ़ते ही रहे हैं। नवीं लोकसभा के लिए 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 18 राज्यों में 245 प्रत्याशी खड़े किए थे जिसमें से तीन पर उसे सफलता मिली थी। इसके बाद 1991-92 (सिर्फ पंजाब) में 10वीं लोकसभा के चुनाव में बसपा ने 243 प्रत्याशी उतारे जिसमें से पार्टी ने तीन पर ही विजय पताका फहरायी थी। इसी तरह 1996 के चुनाव में पार्टी ने 16 राज्यों की 210 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे जिसमें जीते नौ थे। राष्ट्रीय पार्टी बनने के बाद भी 1998 के चुनाव में बसपा ने 251 से ज्यादा प्रत्याशी नहीं उतारे थे लेकिन उसमें भी सफलता सिर्फ पांच पर मिली थी। ऐसे ही 1999 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 225 प्रत्याशी उतारे थे जिसमें से 14 विजयी हुए थे।
लोकसभा चुनावों में बसपा प्रत्याशियों का लेखा-जोखा
वर्ष सीटें लड़ी सीटें जीती
1989 245 03
1991 243 03
1996 210 09
1998 251 05
1999 225 14
2004 435 19
2009 500 21
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