एक्ट में संशोधन को सरकार तैयार, अब अपराधी किशोरों की खैर नहीं


narendra modiनई दिल्ली। अपराधी बचे नहीं और बच्चे फंसे नहीं इस उद्देश्य से लाये जा रहे जुवेनाइल जस्टिस एक्ट संशोधन विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। लेकिन न्यायाधीशों की नियुक्ति की कोलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के लिए लाए जा रहे संविधान संशोधन विधेयक पर कैबिनेट में चर्चा तो हुई लेकिन इस पर फैसला इसलिए टाल दिया गया कि इस मुद्दे पर और विचार विमर्श की जरूरत है।
इस संशोधन के जरिये माना जा रहा है कि सरकार इस विधेयक को मौजूदा सत्र में ही पेश कर देगी ताकि जल्दी से जल्दी कानून प्रभावी हो।
इस विधेयक के जरिये हत्या और दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में शामिल 16 से 18 साल के किशोरों पर मुकदमा चलाने के फैसले का हक जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को दिया जाएगा। मामला और आरोपी को देख कर बोर्ड ही यह तय करेगा कि मुकदमा जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलेगा या फिर सामान्य अदालत में।
निर्भया कांड में नाबालिग की भूमिका को लेकर उठे सवालों के बाद जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में संशोधन कर नाबालिग की उम्र 18 से घटाकर 16 किये जाने की मांग उठी थी। सरकार ने इन मांगों को देखते हुए ही बीच का रास्ता निकाला है जिसमें सीधे तौर पर तो नाबालिग की उम्र नहीं घटाई जा रही है लेकिन गंभीर अपराध में शामिल आदतन अपराधी हो चुके 16 से 18 साल के किशोरों को दंडित करने की व्यवस्था जरूर हो रही है।
बुधवार शाम हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से पेश जुवेनाइल जस्टिस एक्ट संशोधन विधेयक पर विचार हुआ। मंत्रिमंडल ने विचार के बाद संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। संशोधित कानून में आदतन अपराधी बन चुके जघन्य अपराधों में शामिल 16 से 18 साल के किशोरों को सामान्य अदालत में ट्रायल के रास्ते खोलने के साथ ही बच्चों को गोद लेने की व्यवस्था आसान करने के भी इंतजाम किये जा रहे हैं। इसके साथ ही बच्चों को शारीरिक दंड देने वालों पर लगाम कसने की तैयारी है।


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