लखनऊ। नोएडा में घोटालों से अरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा करने वाले इंजीनियर यादव सिंह की संपत्ति की जांच सीबीआई करेगी। आइपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर की यादव सिंह के मामले में जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीबीआइ जांच का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की एसआईटी गठित करने की मांग को भी ठुकरा दिया है।इस मामले की सुनवाई कल की गई थी। आज इसका फैसला आना था।
आयकर विभाग की जांच में यादव सिंह की अकूत संपत्ति का खुलासा होने के बाद सीबीआइ जांच की मांग को ठुकराते हुए राज्य सरकार ने न्यायिक जांच आयोग बनाया था। जिसके खिलाफ नूतन ठाकुर ने जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यादव सिंह प्रकरण को अत्याधिक गंभीर मानते हुए सीबीआइ जांच के आदेश दिए। हाईकोर्ट ने कहा कि उसे नहीं लगता कि अन्य एजेंसियां इसकी सही से जांच कर सकती हैं।इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस की सीबीसीआइडी ने करीब 20 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा करने वाले यादव सिंह को घोटालों के मामले में क्लीन चिट दे दी थी, आयकर विभाग भी यादव सिंह के खिलाफ शुरूआती तेजी दिखाने के बाद धीमा पड़ गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष यादव सिंह की संपत्तियों की सीबीआइ से जांच कराए जाने की मांग वाली याचिका पर सभी पक्षों की कल बहस पूरी हो गई थी। मुख्य न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ व न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला की पीठ के समक्ष जनहित याचिका की सुनवाई में यादव सिंह, राज्य सरकार नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से वकीलों ने अपना पक्ष रखा। याचिका दायर कर कहा गया था कि यादव सिंह ने पद का दुरुपयोग कर बहुत अधिक धन कमाया जो आम जनता की गाढ़ी कमाई है। कहा गया कि इस मामले मे कई बड़े पहुंचवाले अधिकारी व लोग शामिल हैं। लिहाजा पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराई जाए जबकि इस मामले मे विपक्षी पक्षकारों ने याचिका का कड़ा विरोध किया। बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला लिखाना शुरू कर दिया लेकिन शाम को अदालत का समय पूरा होने पर इस मामले में पूरा फैसला आज किया गया।
यादव सिंह अपने राजनीतिक आकाओं की शह पर राज कर रहा था। अखिलेश सरकार ने पहले तो यादव सिंह को कई मामलों में निलंबित किया। इसके चंद रोज बाद ही नोएडा की सभी अथारिटी का चीफ इंजीनियर बना दिया। यादव सिंह के काले कारनामों के दस्तावेज मुख्यमंत्री कार्यालय, सीबीसीआइडी, आयकर विभाग व प्रवर्तन निदेशालय में पड़े रहे। उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार के कार्यकाल में यादव सिंह नोएडा अथॉरिटी का चीफ इंजीनियर था। 2012 में अखिलेश यादव सरकार आई और निलंबित कर दिया। सीबीसीआइडी जांच में क्लीनचिट मिलने के साथ ही तोहफे में नोएडा के अलावा ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर का पद मिला।
सत्ता को उंगलियों पर नचाने का गुमान रखने वाला यादव सिंह आगरा के गरीब दलित परिवार में जन्मा था। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमाधारी यादव सिंह ने 1980 में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नोएडा अथॉरिटी में काम शुरू किया। 1995 में प्रदेश में पहली बार जब मायावती सरकार आई तो 1995 में 19 इंजीनियरों के प्रमोशन को दरकिनार कर सहायक प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर तैनात यादव सिंह को प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर प्रमोशन दे दिया गया। उसको डिग्री हासिल करने के लिए तीन साल का समय भी दिया गया। यादव सिंह को 2002 में नोएडा में चीफ मेंटिनेंस इंजीनियर (सीएमई) के पद पर तैनाती मिली। नौ साल तक यादव सिंह ने इस पद पर मलाई काटी। यह प्राधिकरण में इंजीनियरिंग विभाग का सबसे बड़ा पद था। अथॉरिटी में सीएमई के तीन पद थे, यादव सिंह इससे संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने कई पद खत्म कराकर अपने लिए इंजीनियर इन चीफ का पद बनवाया।
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