पीजीआई में भ्रष्टाचार के मामले में अखिल भारतीय लोकाधिकार संगठन की शिकायत
लखनऊ। अखिल भारतीय लोकाधिकार संगठन ने स्थानीय निधि लेखा
परीक्षा और अन्य तथ्यो के आधार पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान
संस्थान में हुई गम्भीर अनियमितताओं की लिखित शिकायत तथ्यों के साथ
महामहिम कुलाधिपति से की थी। इस मामले में राजभवन सचिवालय द्वारा चलताऊ
आदेश किये जाने से नाराज अखिल भारतीय लोकाधिकार संगठन के राष्ट्रीय
महामंत्री पद्भनाभ त्रिपाठी ने दूख जाहिर करते हुए पुनः महामहिम को पत्र
लिखा है।
श्री त्रिपाठी ने लिखा है कि लगभग 29 करोड़ रूपये की अनियमितता के लिए
तत्कालीन निदेशक डा. आर.के. शर्मा जिम्मेदार है। इस मामले में समाचार
पत्रों एवं स्थानीय निधि लेखा परीक्षा की रिपोर्ट साक्ष्य है लेकिन इसके
बावजूद पत्रावलियाॅ राजभवन तथा सचिवालय में पढ़ी नही जाती। ऐसे में रिट
याचिकाओं के बाद उक्त पत्रावलियाॅ न्यायालयों में पढ़ी जाती है। राजभवन
सचिवालय में पत्रावलियाॅ न पढ़ जाने का आशय यह भी है कि छोटे स्तर के
कर्मचारी से लेकर उच्च स्तर तक के अधिकारी चलताऊ कार्यवाही कर रहे है
परिणाम यह हो रहा है कि भ्र्रष्टाचार से जूझ रहे देश में भ्रष्टाचार की
शिकायतों का लगभग अनादर हो रहा है। उन्होंने अपनी शिकायत पर प्रमुख सचिव
राज्यपाल सुश्री जुथिका पाटणकर के पत्र संख्या ई-3678@21-जी.एस.,28
अप्रैल 15 कहा हवाला देते हुए कहाकि इस पत्र की भाषा एक सामान्य से आवेदन
की भाषा है जबकि लगभग 29 करोड़ की अनियमितता के मामले में यह आदेश
सुस्पष्ट और समयावधि के आधार पर किया जाना चाहिए था।
श्री त्रिपाठी ने पत्र में यह भी लिखा कि 28 मार्च 15 को की गई शिकायत के दो माह बाद
राजभवन से जो आदेश जारी किए गए उसे शुन्य की संज्ञा दी जा सकती है। उक्त
पत्र का हवाला देते हुए गया कि अगर इस तरह के पत्र भ्रष्टाचार के मामले
में राजभवन से जारी होगें तो इस बात का अन्दाजा असानी से लगाया जा सकता
है कि राजभवन भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कितना गम्भीर है। उन्होंने कहा कि
अगर हर मामले के लिए न्यायालय की शरण के लिए बाध्य किया जाए तो भी सबकुछ
न्यायालय पर ही छोड देना चाहिए। उन्होंने महामहिम से प्रार्थना करते हुए
कहा कि खास तौर जहाॅ के वे कुलाधिपति है, जहाॅ पर जनता की गाढ़ी कमाई ही
दोहन नही हो रहा है बल्कि चिकित्सा सुविधा के नाम पर उनका शोषण हो रहा है
वहाॅ के मामले पर वे व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करे तो निश्चित ही
चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार की गुजाइंश है।
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