380 नलकूपों एवं 11 सौर ऊर्जा संचालित
राजकीय नलकूपों का शिलान्यास भी सम्पन्न
मुख्यमंत्री ने जल पुरुष श्री राजेन्द्र सिंह को सम्मानित किया
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं एवं राजकीय नलकूपों का किसानों को सर्वाधिक लाभ उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए। प्रदेश में बहने वाली 06 नदियों-गोमती, सैंगर, अनैया, चन्द्रावल, अखेरी तथा हिण्डन को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य सरकार गम्भीरता से प्रयास कर रही है, ताकि इन नदियों को इनके प्राकृतिक स्वरूप में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि नदियों का संरक्षण आर्थिक रूप से एक बड़ा काम है, लेकिन इसे हर हाल पूरा किया जाएगा।मुख्यमंत्री आज यहां अपने सरकारी आवास पर सिंचाई विभाग की विभिन्न परियोजनाओं एवं राजकीय नलकूपों के लोकार्पण एवं शिलान्यास के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस मौके पर जल पुरूष श्री राजेन्द्र सिंह को सम्मानित करते हुए उन्होंने कहा कि श्री सिंह ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा जन सहयोग से तालाबों के जीर्णाेद्धार एवं खुदाई के प्रति अपना जीवन समर्पित कर दिया है। प्रदेश के जल स्रोतों को इनके प्राकृतिक स्वरूपों में वापस लाने के लिए राज्य सरकार श्री राजेन्द्र सिंह के सुझाव पर अमल करेगी।
श्री यादव ने कहा कि नदियों को सदानीरा बनाने का कार्य आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं जरूरी है। इससे वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आगामी पीढ़ी का हित भी जुड़ा है। उन्होंने गाजियाबाद जनपद में बहने वाली हिण्डन नदी की चर्चा करते हुए कहा कि लगभग 25 वर्ष पूर्व इस नदी का जो स्वरूप था आज इसमें काफी तब्दीली आ गई है। उन्हांेने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस नदी का पहले का स्वरूप वापस लाने के लिए कार्य योजना तैयार करा रही है। पर्यावरण को एक महत्वपूर्ण पहलू बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी उपेक्षा कतई नहीं की जा सकती है। उन्हांेने इस बात पर खुशी जताई कि आम जनता भी अब धीरे-धीरे पर्यावरण के प्रति सचेष्ट होने लगी है, इसीलिए अब लोग आॅर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बड़ी संख्या में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के तालाबों का जीर्णाेद्धार करा चुकी है और अनेक पर काम चल रहा है।
जल व्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए प्रदेश में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का नाॅलेज सेण्टर स्थापित करने का आश्वासन देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विशालता को देखते हुए इस प्रकार का सेण्टर बहुत आवश्यक है। उन्होंने सिंचाई विभाग को बेहतर परिणाम पाने के लिए अपनी कार्यप्रणाली एवं परियोजनाओं में यथा आवश्यक संशोधन करने पर बल दिया। विगत तीन वर्षांे में राज्य सरकार ने जनता से किए गए वायदों को विभिन्न कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं के माध्यम से जमीन पर उतारने का प्रयास किया है। इसके तहत सिंचाई विभाग की वर्षांे से लम्बित कई परियोजनाओं पर कार्य को राज्य सरकार ने अपने आर्थिक संसाधनों से तेजी से आगे बढ़ाया है। विभाग की तमाम ऐसी परियोजनाएं हैं जिन पर केन्द्र सरकार को आर्थिक मदद देनी है, लेकिन भारत सरकार अपने हिस्से की धनराशि नहीं उपलब्ध करा रही है।
श्री यादव ने लखनऊ नगर मंे गोमती नदी के तट विकास के लिए बनाए जा रहे डायफ्राम का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस ढंग से नदी तट को विकसित करने की योजना बनायी गई है, उसके अनुरूप कम से कम 500 मीटर का काम दीपावली से पहले पूरा किया जाए, जिससे जनता को पता चले की परियोजना के पूरा होने पर नदी तट कैसा दिखाई देगा। उन्हांेने देश एवं प्रदेश की तरक्की के लिए अभियंताओं को आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि अभियंताओं को विकसित देशों की परियोजनाओं की गुणवत्ता एवं तकनीक के अनुरूप यहां की परियोजनाओं को पूरा करना चाहिए।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों में डाॅ0 राम मनोहर लोहिया नवीन नलकूप परियोजना के तहत नवनिर्मित 1020 राजकीय नलकूपों का लोकार्पण तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में बनने वाले 380 नलकूपों का शिलान्यास किया। इसके साथ ही, जनपद चन्दौली की धनकुवांरी, सोगाई व महदेउर नवनिर्मित तथा बलुआ एवं कुण्डाकला पम्प नहरों के जीर्णाेद्धार के कार्याें का लोकार्पण किया। इनके अलावा जनपद चन्दौली की कर्मनासा नदी पर बने 16 पम्प नहरों को स्वतंत्र फीडर से संयोजन के कार्याें का लोकार्पण भी किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 11 सौर ऊर्जा संचालित राजकीय नलकूपों का शिलान्यास भी किया। साथ ही, आजमगढ़, कन्नौज, नोएडा, मैनपुरी एवं इटावा जनपद में नवलोकार्पित नलकूपों पर रोपण के लिए प्रतीक के तौर पर सम्बन्धित जनपदों के अभियंताओं को पारिजात का पौधा भी उपलब्ध कराया। इसी प्रकार प्रदेश के सभी राजकीय नलकूपों पर एक-एक वृक्ष रोपित किए जाएंगे। उन्होंने जनपद ललितपुर के कचनौदा बांध पर नवीनतम स्काडा तकनीक का प्रयोग करते हुए गेटों को कार्यक्रम स्थल से ही खोलकर इस स्वचालित तकनीक का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सिंचाई मंत्री श्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप 19 लाख हेक्टेअर सिंचन क्षमता में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि 30-30 वर्ष से लम्बित सिंचाई परियोजनाओं को वर्तमान राज्य सरकार पूरा करने का काम कर रही है।
मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन ने कहा कि जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार अभियान के तौर पर काम कर रही है। अब तक लगभग 40 हजार से अधिक तालाबों को पुनर्जीवित किया गया है।
प्रमुख सचिव सिंचाई श्री दीपक सिंघल ने कहा कि विगत दो वर्षाें में विश्व बैंक के 1600 करोड़ रुपये का सदुपयोग करते हुए परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अवसर पर श्री राजेन्द्र सिंह ने कहा कि जल संरक्षण को लेकर उनका हमेशा सरकारों से संघर्ष चलता रहता है, लेकिन प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री के पर्यावरण एवं जल संरक्षण के प्रयासों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यदि मुख्यमंत्री थोड़ा भी प्रयास करें तो नदियों एवं जल स्रोतों को उनका प्राकृतिक स्वरूप वापस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार पहली ऐसी सरकार होगी जो नदी का अधिकार लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कार्याे के दृष्टिगत हाल ही में स्टाॅकहोम में सम्पन्न अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन को पर्यावरण रक्षक सम्मान तथा श्री दीपक सिंघल को जल प्रशासक के रूप में सम्मानित करने का फैसला किया गया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अहमद हसन, राजनैतिक पेंशन मंत्री श्री राजेन्द्र चैधरी, सिंचाई राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र सिंह पटेल, प्रमुख सचिव सिंचाई श्री टी0 वेंकटेश सहित अन्य अधिकारी एवं अभियंता उपस्थित थे।
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