मेरे पिता दाउद इब्राहिम नहीं थे ,फिर क्यों हुई उनकी जासूसी’


2015_9image_19_19_03499104504-llकोलकाता: पश्चिम सरकार ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से जुड़ी 64 गोपनीय फाइलों को आज सार्वजनिक कर दिया जिसमे इस बात के कोई सबूत नहीं है कि नेताजी की मौत वर्ष 1940 के मध्य में ताइवान के ताइहोकू में एक विमान दुर्घटना में हुयी थी।  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले सप्ताह इन 64 फाइलों को सार्वजनिक करने का वादा किया था। इस वादे को पूरा करते हुए राज्य सरकार ने इन फाइलों को आज यहां सार्वजनिक कर दिया।  इन फाइलों वह पत्र भी है जो उस समय नेताजी के भाई अमिय बोस को केन्द्र की ओर से भेजा गया था जिसमें यह साफ लिखा है कि भारत सरकार को ताइवान में ऐसी किसी विमान दुर्घटना के बारे में कोई सूचना नहीं है जिससे नेताजी के मारे जाने की पुष्टि हो सके।

सुश्री बनर्जी ने ट््वीट किया‘आज का दिन ऐतिहासिक है। हमारी सरकार ने नेताजी से जुड़ी सभी फाइलों को सार्वजनिक कर दिया है। लोगों को भारत के बहादुर बेटे के बारे जानने का अधिकार है।’

वहीं दूसरी तरफ नेताजी के रिश्तेदारों ने इस महान स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिवार की कथित जासूसी की जांच कराने की मांग की है। सुभाष चंद्र बोस के भाई के पोते चंद्र बोस ने एक निजी खबरिया चैनल से कहा कि सार्वजनिक किए गए नए दस्तावेजों से साबित होता है कि ताइवान में 18 अगस्त, 1945 को एक विमान दुर्घटना में नेताजी की कथित मृत्यु के बाद सरकार ने बोस परिवार की जासूसी कराई थी।

बोस कहते हैं कि उन्होंने मेरे पिता अमिया नाथ बोस की जासूसी क्यों कराई? वह दाऊद इब्राहिम नहीं थे! फिर भी उन्होंने उन (अमिया नाथ बोस) पर नजर रखने के लिए खुफिया विभाग के 14 लोग तैनात कर रखे थे। भारतीय सरकार को एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी के परिवार की जासूसी कराने की जरूरत क्यों आन पड़ी? मैं मांग करता हूं कि पीएम (नरेंद्र) मोदी इसकी जांच कराएं। गौरतलब है कि अमिया नाथ बोस नेताजी के भतीजे थे।


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