उत्तराखण्ड सरकार वर्षों पुरानी रामलीलाओं को प्रोत्साहित करेगी—— मुख्यमंत्री हरीश रावत


 

 

700x380xHarish-Rawat11.jpg.pagespeed.ic.y7Z2jbmU7jदेहरादून |    उत्तराखण्ड की विरासत मानी जाने वाली वर्षों पुरानी रामलीलाओं को राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्य स्थापना के 15 वर्ष पूरे होने पर जागेश्वर, टिहरी व देहरादून में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  बीजापुर हाउस में संस्कृति विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि रामलीलाएं हमारी संस्कृति व परम्परा का अभिन्न हिस्सा हैं। इन्हें प्रोत्साहित करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। सौ से अधिक वर्षों से चली आ रही रामलीलाओं को 1 लाख रूपए, पचास से सौ वर्ष पुरानी रामलीलाओं को 75 हजार रूपए जबकि पचीस से पचास वर्ष पुरानी रामलीलाओं को 50 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाए।

मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि इस वर्ष राज्य स्थापना के 15 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम केवल देहरादून तक सीमित न रहें। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के साथ ही उत्तराखण्ड की संस्कृति व पारम्परिक उत्तराखण्डी व्यंजनों पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। ये आयोजन 6 नवम्बर को अल्मोड़ा के जागेश्वर में, 7 नवम्बर को टिहरी में जबकि 8 नवम्बर को देहरादून में किए जाएं। राज्य स्थापना दिवस पर 9 नवम्बर को देहरादून में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाए।

इसी में राज्य शिल्पियों के साथ ही हरेला व झुमैलो कार्यक्रमों के विजेताओं को भी सम्मानित किया जाना है। हरिद्वार में जन्माष्टमी पर उत्कृष्ट झांकियां प्रदर्शित करने वाले विजेताओं को भी सम्मानित किया जाए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने इन प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहे लोगों को सम्मानित करने के निर्देश दिए।बैठक में सचिव संस्कृति शैलेश बगोली, निदेशक संस्कृति बीना भट्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।


Scroll To Top
Translate »