146 दुग्ध उत्पादकों को गोकुल पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया


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लखनऊ,। उत्तर प्रदेश के दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चैधरी ने वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में समितियों के माध्यम दुग्ध संघों को सर्वाधिक दुग्ध उपलब्ध कराने वाले 146 दुग्ध उत्पादकों को गोकुल पुरस्कार से पुरस्कृत किया। दुग्ध विकास मंत्री ने वर्ष 2015-16 में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादित करने वाली श्रीमती राजपति को प्रथम पुरस्कार, फर्रूखाबाद के श्री जाहर सिंह को द्वितीय पुरस्कार तथा लखीमपुर खीरी के श्री राम सनेही सिंह को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके साथ ही उन्होंने जनपद स्तर के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया। इसी के साथ उन्होंने वर्ष 2016-17 के चयनित लाभार्थी लखीमपुर खीरी जनपद के श्री वरूण सिंह को प्रथम, तथा लखनऊ की श्रीमती नीलम सिंह को द्वितीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

वर्ष 2015-16 के प्रदेश स्तरीय प्रथम पुरस्कर विजेता को 1 लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार विजेता को 75 हजार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार विजेता को 50 हजार रुपये एवं जनपद स्तर के विजेताओं को 22 हजार रुपये की नकद धनराशि तथा पीतल धातु पर गाय के साथ दूध पीता हुआ बछड़ा व भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की शील्ड प्रदान की गई। शासन की नीतियों के तहत वर्ष 2016-17 से गोकुल पुरस्कार की धनराशि में बढ़ोत्तरी की गई है। वर्ष 2016-17 के प्रदेश स्तरीय प्रथम पुरस्कार विजेता को 1.50 लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार विजेता को 1 लाख तथा जनपद स्तर के विजेताओं को 51 हजार रुपये की नकद धनराशि व पीतल धातु पर गाय के साथ दूध पीता हुआ बछड़ा व भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की शील्ड प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि गोकुल पुरस्कार वर्ष 2001-02 से दिया जा रहा है।

दुग्ध विकास मंत्री ने इस मौके पर घोषणा किया कि वर्ष 2017-18 में चयनित प्रथम विजेता को 2 लाख, द्वितीय विजेता को 1.50 लाख रुपये की धनराशि दी जायेगी। उन्होंने कहा कि सर्वाधिक दूध उत्पादित करने वाले देशी गाय पालकों को नन्दबाबा पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। इसके लिए 1 लाख रुपये की धनराशि विजेता को प्रदान की जायेगी। साथ ही पराग द्वारा निर्मित दिवाली के शुभ अवसर पर एक निश्चित मिठाई (असार्टेड स्वीट्स) के हैम्पर का भी शुभारम्भ किया गया। उन्होंने सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाले विजेताओं को बधाई दी।

इस मौके पर प्रमुख सचिव दुग्ध विकास, श्री सुधीर महादेव बोबड़े ने कहा कि प्रादेशिक को-आपरेटिव डेरी फेडरेशन से सम्बद्ध सहकारी क्षेत्र की दुग्ध समितियों में दूध दे रहे उत्पादकों को उचित मूल्य उनके बैंक खाते में सीधे दिलाने के लिये प्रत्येक दुग्ध समिति में आधुनिक मशीन ‘‘डेटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन यूनिट’’ की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि डी0पी0एम0सी0यू0 के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को उनके द्वारा दी जा रही दूध की मात्रा तथा गुणवत्ता की तुरन्त गणना के आधार पर दुग्ध मूल्य की सूचना एस0एम0एस0 द्वारा उनके मोबाइल पर प्राप्त हो जायेगी। साथ ही साथ दुग्ध उत्पादक का दुग्ध मूल्य उनके खाते में एक निश्चित अन्तराल में इलेक्ट्रानिक ट्रांसफर से पहुंच जायेगा। इस पारदर्शी व्यवस्था में दुग्ध उत्पादक पूर्णतः शोषण मुक्त भी हो जायेगा।
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रमुख सचिव ने बताया कि प्रत्येक दुग्ध उत्पादक के दुग्ध मूल्य की सूचना जिला स्तरीय दुग्ध संघ में स्थापित कन्ट्रोल रूम में भी रहेगी। इसके साथ ही लखनऊ स्थित प्रदेश स्तरीय सेन्ट्रल कन्ट्रोल रूम में भी प्रत्येक उत्पादक की सूचना रहेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान योजना के अनुसार प्रदेश में 12859 दुग्ध समितियों में डेटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन यूनिट की स्थापना का प्राविधान आगामी तीन वर्षों में है। इस क्रम में 600 से अधिक डी0पी0एम0सी0यू0 स्थापित किये जा चुके हैं। मथुरा दुग्ध संघ के अन्तर्गत 499 डी0पी0एम0सी0यू0 आगामी वर्षों में लगाये जायेंगे।


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