
लखनऊ। पूरा प्रदेश वर्तमान में भीषण गर्मी की चपेट में है। अनेकों जनपदों में बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से उपभोक्ताओं को महज इसलिये अच्छी गुणवत्ता की बिजली नही मिल पा रही है क्योंकि बिजली कम्पनियांे का सिस्टम अधिभारित है। उपभोक्ता परिषद आज जो खुलासा कर रहा है उससे सभी के होश उड जायेंगे। पूरे प्रदेश में टैरिफ में अनुमोदित आंकडों की बात की जाये तो वर्ष 2017-18 में प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की जो कुल सॅंख्या दर्शायी गयी है वह लगभग 2 करोड 11 लाख है और उनके द्वारा लिया गया संयोजित भार 5 करोड 18 लाख किलोवाट है।
वहीं दूसरी ओर आयोग द्वारा अनुमोदित ट्रांसमीशन टैरिफ पर नजर डालें तो उसमें वर्ष 2017-18 में 132 केवी सबस्टेशनों की जो कुल क्षमता दर्शायी गयी है वह लगभग 44051 एमबीए है। यदि इसे किलोवाट में निकाला जाये तो लगभग 3 करेाड 96 लाख किलोवाट होगा। अर्थात प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार व 132 के0वी0 सबस्टेशनों की क्षमता के बीच लगभग 1 करोड किलोवाट का गैप है। इस भीषण गर्मी में पीक आवर्स में जब उपभोक्ता अपने संयोजित भार का फुल लोड चलायेगा और ऊपर से सिस्टम पर लगभग 25 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड। ऐसे में सिस्टम पूरी तरह मिस मैच कर रहा है। चाहकर भी बिजली कम्पनियाॅं उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध होते हुये भी जब तक सिस्टम नही सही होगा बिजली नही दे पायेंगी। डायवर्सी फैक्टर 1 अनुपात 1 पर नजर डालें तो पीक आवर्स में सिस्टम की क्षमता और उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार की क्षमता कम से कम बराबर होनी चाहिये।
उ. प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जिस प्रकार से बिजली कम्पनियाॅं आये दिन प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का मनमाने तरीके से भार बढाती हैं रोज नये कनेक्शन अभियान चलाये जाते हैं उसी तरह सब से पहले बिजली कम्पनियों को सिस्टम का भार बढाना चाहिये। उपभोक्ता परिषद लम्बे समय से इस बात को टैरिफ की सुनवाई में भी उठा रहा है कि सबसे पहले बिजली कम्पनियाॅं सिस्टम को सही करे फिर बिजली दर बढाने की बात करे। लेकिन बिजली कम्पनियाॅं केवल अपना राजस्व बढाने के लिये आये दिन प्लान बनाती हैं लेकिन उनको इस बात की चिन्ता नही रहती कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता की बिजली मिल रही है कि नही। पूरे प्रदेश में अनेकों जनपदों व महानगरों में पीक आवर्स में उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज का शिकार होना पडता है। चाहकर भी वह बिजली का उचित उपयोग नही कर पाते। जो अपने आप मंे घोर चिन्ता का विषय है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा उ.प्र.सरकार सरकारी विभागों पर जो लगभग 10722 करोड का बकाया है उसे बिजली कम्पनियों को बजटीय प्रोविजन से वापस दिलायें जिससे वह पैसा सिस्टम पर खर्च होकर सिस्टम को सही किया जा सके।
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