दिल्ली | राजनीतिक उठापटक और अस्थिरता के बीच अरुणाचल प्रदेश राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ गया है. केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक रविवार को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक बुलाई गई. जिसमें अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की गई.
इस बीच विभिन्न राजनीतिक दलों ने सरकार के इस फैसले को अलोकतांत्रिक करार दिया है. कांग्रेस ने सरकार के इस निर्णय के संदर्भ में कहा कि मोदी सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है.
इस मसले पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि इस फैसले के लिए उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने का मोदी सरकार का यह फैसला संवैधानिक आदेशों की अवहेलना है और कांग्रेस इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी.
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के ही कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर राष्ट्रपति इस सिफारिश पर अपनी मुहर लगा देते हैं तो पार्टी इसे कोर्ट में चुनौती देगी.केंद्र सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे संविधान की हत्या बताया है.
अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का यह दौर पिछले साल 16 दिसंबर से शरू हुआ. कांग्रेस के 21, भाजपा के 11 और 2 निर्दलीय विधायकों ने मिलकर एक सामुदायिक केंद्र में विधानसभा का सत्र आयोजित किया. इसमें इन विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया पर महाभियोग चलाया.
विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों के इस कदम को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था. इसके बाद गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए इन विधायकों के द्वारा समय से पहले सत्र बुलाने को असंवैधानिक ठहराते हुए बागियों की ओर से लिए गए फैसलों पर रोक लगा दी.
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