जयपुर। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा है कि देश के सौ जिलों में शुरू किए गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की कामयाबी को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बड़ाने का निर्णय किया है। अब यह अभियान 61 नए जिलों में शुरू किया जाएगा। इनमें राजस्थान के बारह जिले शामिल हैं। सोमवार को जयपुर में शुरू हुए दो दिवसीय क्षेत्रीय संपादक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मेनका गांधी ने कहा कि देश भर में आंगनबाड़ी केन्द्रों को और सशक्त बनाने की पहल हो चुकी है तथा 50 हजार नए आंगनबाड़ी केन्द्र भी इस वर्ष शुरू कर दिए जाएंगे।
उद्घाटन सत्र में अपने विभाग द्वारा पिछले दो साल में किए गए कामों का उल्लेख करने के बाद क्षेत्रीय संपादकों से सीधे बात करते हुए मेनका ने बिंदूवार सभी विभागीय योजनाओं और उनसे जुड़े सवालों के जवाब भी दिए। सम्मेलन में देश भर के करीब सौ क्षेत्रीय संपादक हिस्सा ले रहे हैं।
मेनका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब सत्ता संभाली और उन्हे इस विभाग का जिम्मा सौंपा तो देश में पहली बार महिला एवं बाल विकास विबाग को पूर्णकालिक मंत्री मिला। इससे पहले तो इस मंत्रालय का अपना कोई कार्यालय भी नहीं ता और वे कई दिनों तक कोयला मंत्रालय में बैठ कर काम करती रहीं। उन्होने कहा कि एसे में जब विपक्ष संसद में कोई काम नहीं होने दे रहा, एकमात्र उनके मंत्रालय को बड़ी कामयाबी मिली और राज्यसभा ने बाल न्याय विधेयक पारित किया। यह विधेयक अब लोकसभा में भी पारित हो जाएगा।
विधेयक में 16 से 18 वर्ष के बच्चों के साथ अन्याय करने वालों को सख्त सजा का प्रावधान है। मेनका गांधी ने निर्भया कोष, महिला हेल्प लाइन, कार्यस्थलों पर महिला के उत्पीड़न रोकन,विभिन्न योजनाओं में महिलाओं को आरक्षण,सबला योजना, राष्ट्रीय महिला कोष,मोबाइल फोन पर पैनिक बटन प्रणाली , विधवाओं का नाम पति के निधन के प्रमाण पत्र में शामिल करने, वन्दावन में विधवाओं के लिए आश्रय स्थल आदि कई मुद्दों पर संपादकों के सवालों के जवाब दिए।
मेनका गांधी ने कहा कि सरकार गांवों में महिला सरपंचों और महिला प्रधानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करने के खास उपाय शुरू कर चुकी है। अब गांवों में महिला सरपंच या प्रधान के पति उनके काम में दखल में नहीं कर सकेंगे और सरपंच पति या प्रधान पति के रूप में नहीं जाने जाएंगे। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग को कहा गया है कि वह गांवों में महिला सरपंच को प्रशिक्षण दे ताकि वे अपना काम बखूबी कर सकें।
उन्होने बताया कि गांवों में स्पेशल पुलिस वालिंटियर की तैनाती का काम शुरू किया जा रहा है। इसमें गांव की एक महिला को प्रशिक्षित कर पुलिस विभाग से समन्वय के लिए तैयार किया जाएगा । कोई भी पीडित महिला इस स्पेशल पुलिस वालिंटियर से संपर्क कर अपनी परेशानी रख सकेगी।
https://rashtriyadinmaan.com

