नई दिल्ली. सहारा ग्रुप के ओनर सुब्रत रॉय की किताब सोमवार को रिलीज हुई। रॉय ने लिखा है कि जेल की जिंदगी में काफी तकलीफ और अकेलापन है। लेकिन भगवान की दया से मैंने टेंशन फ्री जिंदगी जीने का आर्ट सीख लिया है। इन्वेस्टर्स से करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में रॉय करीब दो साल से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
सुब्रत बोले– मैंने गलत क्या किया…
– रॉय की किताब का नाम ‘लाइफ मंत्राज’ है। ये किताब उन्होंने जेल में ही लिखी है।
– ये उनकी तीन किताबों की सीरीज ‘थॉट्स फ्रॉम तिहाड़’ का पहला हिस्सा है।
– 1 फरवरी को सहारा के 39वें फाउंडेशन डे के मौके ‘लाइफ मंत्राज’ को रिलीज किया गया।
– रॉय लिखते हैं, “जेल की कोठरी में जितनी फैसिलिटी मिली हैं, वो किसी शॉक लगने से कम नहीं है। मुझे अक्सर ताज्जुब होता है कि आखिर मैंने ऐसा क्या गलत किया।”
– “जेल में किसी अन्य कैदी की तरह मैंने भी यही सोचा कि मेरे साथ ही गलत क्यों हुआ? इस तरह की बातें लगातार दिमाग में आती हैं।”
– “जेल में दुनिया से कटे आदमी की हालत इस तरह हो जाती है कि वह अपने बाल खींचने लगे या तो पागल हो जाए।”
वक्त ही लगाएगा जख्मों पर मरहम
– “सिर्फ वक्त ही जख्मों पर मरहम लगाने का काम करता है।”
– “कुछ लोग कहते हैं कि वे खुशनुमा जिंदगी तभी जी सकते हैं, जब उनके पास ढेर सारा पैसा और फैसिलिटीज हों। लेकिन आदमी को खुशी इन सबसे परे जाकर ही मिलती है।”
– “यदि किसी को इस पर यकीन न हो तो वो मुझसे मिल सकता है। मैं इसे प्रैक्टिकली प्रूव कर दूंगा।”
– “क्या आप जानते हैं कोई क्यों पागल हो जाता है? क्योंकि वह अपने अंदर की पर्सनैलिटी के लिए खुराक लेना बंद कर देता है। न तो वह अपने कामों में बदलाव करता और न ही अपने इमोशन को किसी से शेयर करता है।”
– रॉय यह भी कहते हैं कि किताब उन्होंने टेंशन के दौरान लिखी है, लेकिन यह उनकी ऑटोबायोग्राफी नहीं है।
सेबी की याचिका मंजूर, आज SC में सुनवाई
– सहारा समूह के खिलाफ मार्केट रेग्युलेटर सेबी की (रिपेमेंट ऑफ मनी) याचिका सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई है।
– सुप्रीम कोर्ट में सेबी की याचिका की सुनवाई 2 फरवरी को होनी है।
– सेबी की ओर से वकील अरविंद दातार के मुताबिक, पिछले तीन महीने से निवेशकों का पैसा लौटाने को लेकर कोई डेवलपमेंट नहीं हुआ है। इस मामले को लेकर हम कोर्ट से अंतरिम ऑर्डर चाहते हैं।
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