आकांक्षा समिति की प्रदेश अध्यक्षा एवं समाज सेविका श्रीमती सुरभि रंजन ने कहा है कि संगीत से समाज में भावनात्मक समरसता का भाव उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि संगीत ऐसी कला है जिससे श्रोताओं के अन्दर आनन्द की अनुभूति एवं तनाव से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि 40 से 70 साल के सभी पुरुषों एवं महिलाओं को ‘जज्बा/40’ ने अपनी आवाज का जादू बिखेरने का मंच प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रयोग से बहुत से नये लोगों को जो 40 वर्ष की उम्र को पार कर चुके हैं, जिन्हें किन्हीं कारणों से अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का उचित मंच प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें इस मंच के माध्यम से अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का मंच प्राप्त हुआ है।
श्रीमती सुरभि रंजन आज यह विचार यहां लखनऊ महोत्सव में ‘जज्बा/40 एक अनोखी प्रतियोगिता’ का शुभारम्भ करने के उपरान्त व्यक्त कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि ऐसा लखनऊ महोत्सव में पहली बार किया जा रहा कि 40 से 70 साल के सभी पुरुषों एवं महिलाओं को अपनी गायकी का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है और प्रतियोगिता में चुने हुये लोगों को 05 दिन तक महारत प्राप्त गायकों से गायकी का प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे भी ज्यादा खुशी की बात है कि फाइनल में पहुंचने वाले प्रतिभागियों के गानों को रिकार्ड कर उनके अलबम का भी प्रकाशन कराया जा रहा है, जिससे इनकी प्रतिभा और अधिक मुखर होगी।
श्रीमती सुरभि रंजन ने कहा कि संगीत जब बजता है तो अच्छे से अच्छा और बुरे से बुरा इंसान भी एक बार थिरकने पर मजबूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि संगीत के कई रूप है, कभी माँ की लोरी में तो कभी पिता की थपकी में, ईश्वर के भजन में तो अल्लाह की अजान में, संगीत रोते हुए लोगों को हंसाता है तो हँसते हुए लोगों को रुलाता भी है। उन्होंने कहा कि संगीत इंसान की खुशियों में हमेशा शामिल रहता है तो गम में भी साथ देता है। संगीत की पहुँच हर जगह है।
‘जज्बा/40 कार्यक्रम के निर्णायक मण्डल के वरिष्ठ सदस्य आकांक्षा समिति की प्रदेश अध्यक्षा एवं समाज सेविका एवं सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती सुरभि रंजन, को शिल्ड देकर लखनऊ महोत्सव में सम्मानित किया गया।
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